विदेश की खबरें | चीन के यूक्रेन मामले के राजदूत ने सरकारों से ‘‘युद्ध मैदान में हथियार नहीं भेजने’’ की अपील की
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

ली हुई की अपील ऐसे समय आई है जब अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगी यूक्रेन की सेना को मिसाइल, टैंक और अन्य हथियारों की आपूर्ति बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं जो रूसी सेना को अपने इलाके से पीछे धकेलने की कोशिश कर रही है।

ली ने कहा कि रूसी और यूक्रेनियाई अधिकारियों के समक्ष शांति वार्ता का विकल्प खुला है लेकिन उन्होंने भविष्य में ऐसी वार्ता का कोई संकेत नहीं दिया।

चीन की शी चिनफिंग सरकार ने कहा है कि उसका यूक्रेन-रूस युद्ध पर तटस्थ रुख है और वह दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाना चाहता है। हालांकि वह राजनीतिक रूप से रूस का समर्थन करता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चीन की पहल के कामयाब होने की बहुत ही कम संभावना है क्योंकि दोनों पक्ष लड़ाई रोकने को तैयार नहीं हैं, लेकिन इससे बीजिंग को वैश्विक स्तर पर अपनी कूटनीतिक भूमिका बढ़ाने में मदद मिलेगी।

ली ने संवाददाताओं ने कहा, ‘‘चीन का मानना है कि अगर हम वास्तव में युद्ध समाप्त करना चाहते हैं, जिंदगियों को बचाना और शांति को मूर्त रूप देना चाहते हैं तो हमारे लिए जरूरी है कि हम युद्ध मैदान में हथियार भेजना बंद करें नहीं तो तनाव बढ़ेगा।’’

चीन एकमात्र प्रमुख देश है जिसके रूस और यूक्रेन दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं और दोनों के लिए वह बड़ा निर्यात बाजार है।

शी द्वारा राजदूत भेजने के फैसले का यूक्रेन की सरकार ने स्वागत किया था लेकिन बीजिंग द्वारा फरवरी 2022 में रूस के हमले से पहले क्रेमलिन (रूस) से ‘दोस्ती की कोई सीमा नहीं होने’की घोषणा करने के बाद उसकी मंशा पर उठाए थे।

बीजिंग ने इस साल फरवरी में शांति प्रस्ताव पेश किया था लेकिन यूक्रेन के सहयोगी देशों ने जोर दिया था कि पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी सेना यूक्रेन से वापस बुलाएं।

रूस में चीन के पूर्व राजदूत ली ने कहा, ‘‘चीन का लक्ष्य शांति वार्ता को प्रोत्साहित करना और दुश्मनी खत्म कराना है।’’

गौरतलब है कि मई महीने के मध्य में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी की यात्रा की थी तब यूरोपीय सरकारों ने उनके देश को मिसाइल, टैंक और ड्रोन की आपूर्ति करने का वादा किया था।

ली ने दोहराया कि बीजिंग ‘‘सभी देशों की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने का आह्वान करता है।’’लेकिन इसका कोई संकेत नहीं दिया कि चीन, रूस पर यूक्रेन के कब्जे वाले इलाके वापस करने के लिए दबाव बनाएगा या नहीं।

उल्लेखनीय है कि रूस का क्रीमिया प्रायद्वीप और यूक्रेन के रूसी भाषी पूर्वी इलाकों पर कब्जा है।

पोलैंड, फ्रांस, जर्मनी और यूरोपीय संघ मुख्यालय का दौरा कर चुके ली ने कहा कि बीजिंग संभावित ‘राजनीतिक समाधान’ पर चर्चा करने के लिए दूसरा प्रतिनिधिमंडल भेजने को तैयार है। लेकिन चीन के संभावित अगले कदम की जानकारी नहीं दी।

बिना किसी पक्ष का नाम लिए ली ने कहा, ‘‘वास्तव में दुनिया में कौन समस्या पैदा कर रहा है और दुनिया के लिए वास्तविक सुरक्षा खतरा कौन है? विश्व समुदाय यह जानता है।’’

एपी

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