इस्लामाबाद, नौ जुलाई पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसन इकबाल ने दावा किया कि चीन ने 2018 के आम चुनावों से पहले पाकिस्तान की तत्कालीन सरकार को किसी भी तरह के "नये प्रयोग" के खिलाफ चेतावनी दी थी।
मंत्री ने शनिवार रात एक निजी समाचार चैनल 'जियो टीवी' के एक कार्यक्रम के दौरान यह दावा किया।
कार्यक्रम के दौरान इकबाल ने 60 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत वाले चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) को नुकसान पहुंचाने को लेकर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ नीत पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधा।
जियो टीवी ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के नेता के हवाले से कहा, "चीन ने कूटनीतिक तरीके से तत्कालीन सरकार को किसी भी नये प्रयोग से बचने के लिए (एक संदेश) देने की कोशिश की थी क्योंकि इससे सीपीईसी को नुकसान पहुंचता।"
पाकिस्तान की तत्कालीन सरकार ने चीन को आश्वस्त किया था कि यहां जो भी सरकार सत्ता में आएगी, वह सीपीईसी के बुनियादी ढांचे और ‘कनेक्टिविटी’ परियोजना में बाधा उत्पन्न नहीं करेगी।
योजना मंत्री ने कहा, चीन ने सरकार से चुनावों में हस्तक्षेप नहीं करने को कहा था क्योंकि "परिवर्तन का कोई भी प्रयोग पाकिस्तान के लिए फायदेमंद नहीं होगा और सीपीईसी को नष्ट कर देगा"।
एक प्रश्न के जवाब में मंत्री ने देश की प्रगति और विकास के लिए नीतियों की निरंतरता की आवश्यकता पर बल दिया।
इकबाल ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पर सीपीईसी परियोजना को बदनाम करने का आरोप लगाया और कहा कि परियोजना के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए और पश्चिमी देशों की मीडिया ने इमरान खान की पार्टी के नेताओं द्वारा दिए गए विवादास्पद बयानों को बढ़ा-चढ़ा कर प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि इमरान खान नीत सरकार के दौरान मंत्री रहे मुराद सईद ने उनके खिलाफ सीपीईसी से जुड़े आधारहीन भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।
इकबाल ने कहा, शायद, ऐसा पहली बार हुआ कि चीन की सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी ने उस मंत्री के खिलाफ निंदनीय बयान जारी किया, जिसके साथ वह काम कर रही थी।
उन्होंने दावा किया कि इमरान खान नीत तत्कालीन सरकार ने आधारहीन आरोपों, चीनी श्रमिकों के वीजा नवीनीकरण में देरी और अन्य रणनीति के माध्यम से पीएमएल-एन द्वारा सीपीईसी परियोजना को बर्बाद कर दिया।
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