विदेश की खबरें | अमेरिकी अधिकारियों को ताइवान दौरे से नहीं रोक सकता चीन : पेलोसी
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

पेलोसी का एशिया दौरा बेहद सुर्खियों में रहा और इस दौरान उनकी ताइवान की यात्रा और चीन की इसे लेकर नाराजगी विशेष तौर पर चर्चा में रही।

पेलोसी ने कहा कि चीन ने ताइवान को अलग-थलग करने की कोशिश की, जिसमें हाल में उसे विश्व स्वास्थ्य संगठन में शामिल होने से रोकना शामिल है। उन्होंने कहा, ‘‘वे ताइवान को अन्य स्थानों पर जाने या भाग लेने से रोक सकते हैं लेकिन वे हमें ताइवान की यात्रा करने से रोककर उसे अलग-थलग नहीं कर पाएंगे।’’

अमेरिकी नेता ने कहा कि ताइवान की उनकी यात्रा का मकसद द्वीप के लिए यथास्थिति में बदलाव लाना नहीं था बल्कि ताइवान जलडमरूमध्य में शांति बनाए रखना था। उन्होंने चीन की व्यापार समझौतों के उल्लंघन, हथियारों के प्रसार और मानवाधिकार संबंधी समस्याओं को लेकर आलोचना की जबकि ताइवान की एलजीबीटीक्यू अधिकारों सहित विविधता, प्रौद्योगिकी के प्रसार और व्यापार में सफलता सहित लोकतंत्र की स्थापना के लिये प्रशंसा की।

पेलोसी ने कहा, “हम अगर वाणिज्यिक हितों के कारण चीन में मानवाधिकारों के लिए आवाज नहीं उठाते हैं, तो हम दुनिया में कहीं भी मानवाधिकारों के बारे में बोलने के सभी नैतिक अधिकार खो देते हैं। चीन में कुछ विरोधाभास हैं - लोगों के स्तर को ऊपर उठाने के मामले में कुछ प्रगति हुई तो उइगरों के संदर्भ में कुछ भयानक चीजें हो रही हैं...।”

उन्होंने कहा, “दो बड़े देशों”- अमेरिका व चीन- को जलवायु और अन्य वैश्विक मुद्दों के क्षेत्र में जरूर संवाद करना चाहिए। पेलोसी ने कहा, “अमेरिका-चीन संबंध क्या हैं यह हमारे दौरे से निर्धारित नहीं होगा। यह बहुत बड़ी और दीर्घकालिक चुनौती है और एक बार फिर, हमें यह स्वीकार करना होगा कि हमें कुछ क्षेत्रों में मिलकर काम करना है।”

उन्होंने कहा, “ताइवान के साथ हमारी दोस्ती बहुत मजबूत है। ताइवान में शांति और यथास्थिति के लिए प्रतिनिधि सभा और सीनेट में भारी समर्थन है।”

वह 25 वर्षों में ताइवान की यात्रा करने वाली अमेरिकी संसद की पहली अध्यक्ष हैं। उन्होंने बुधवार को ताइपे में कहा था कि द्वीप और अन्य जगहों पर लोकतंत्र के लिये अमेरिकी प्रतिबद्धता ‘बेहद मजबूत’ हैं।

पेलोसी और संसद के पांच अन्य सदस्य सिंगापुर, मलेशिया, ताइवान और दक्षिण कोरिया की यात्रा करने के बाद बृहस्पतिवार देर रात तोक्यो पहुंचे।

गौरतलब है कि ताइवान पर अपना दावा जताने वाले चीन ने पेलोसी की यात्रा को उकसावा बताया था और बृहस्पतिवार को ताइवान के आसपास के छह क्षेत्रों में मिसाइल दागने समेत सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया था। उसने धमकी दे रखी है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह ताइवान पर बलपूर्वक कब्जा जमा लेगा।

पेलोसी ने कहा कि चीन ने यह ‘कार्रवाई उनके दौरे को बहाना बनाते हुए’ की है।

इससे पहले जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने शुक्रवार को कहा कि ताइवान की ओर लक्षित चीन का सैन्य अभ्यास एक ‘‘गंभीर समस्या’’ को दिखाता है, जिससे क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा को खतरा है।

दरअसल, अभ्यास के तौर पर चीन द्वारा दागी गयी पांच बैलिस्टिक मिसाइलें जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र में गिरीं।

किशिदा ने अमेरिकी संसद की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी और सांसदों के उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ सुबह के नाश्ते के बाद कहा कि मिसाइल प्रक्षेपणों को ‘‘तुरंत रोके’’ जाने की आवश्यकता है।

जापान के रक्षा मंत्री नुबुओ किशी ने कहा कि जापान के मुख्य द्वीप के सुदूर दक्षिण में स्थित हातेरुमा में बृहस्पतिवार को पांच मिसाइलें गिरीं। उन्होंने कहा कि जापान ने यह कहते हुए चीन के समक्ष विरोध दर्ज कराया है कि मिसाइलों से ‘‘जापान की राष्ट्रीय सुरक्षा और जापानी लोगों की जिंदगियों को खतरा है, जिसकी हम कड़ी निंदा करते हैं।’’

जापान के विदेश मंत्री योशिमासा हयाशी ने कहा कि चीन के कदम ‘‘क्षेत्र तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय में शांति एवं स्थिरता को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं तथा हम सैन्य अभ्यास को तत्काल रोके जाने की मांग करते हैं।’’ हयाशी कंबोडिया में एक क्षेत्रीय बैठक में भाग ले रहे हैं।

किशिदा ने कहा कि शुक्रवार को सुबह के नाश्ते पर पेलोसी और कांग्रेस के उनके प्रतिनिधिमंडल ने चीन, उत्तर कोरिया और रूस को लेकर अपनी साझा सुरक्षा चिंताओं पर चर्चा की तथा ताइवान में शांति एवं स्थिरता के लिए काम करने की अपनी प्रतिबद्धता जतायी।

जापान और उसका मुख्य सहयोगी अमेरिका चीन के बढ़ते दबदबे से निपटने के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र और यूरोप में अन्य लोकतंत्रों के साथ नयी सुरक्षा और आर्थिक रूपरेखाओं पर जोर देता रहा है।

बृहस्पतिवार को सात औद्योगिक राष्ट्र के समूह के विदेश मंत्रियों ने एक बयान जारी कर अमेरिका और चीन दोनों से दौरे के मद्देनजर “अधिकतम संयम” बरतने और “भड़काऊ कार्रवाई से बचने” को कहा था

वहीं, बयान को लेकर अपनी नाखुशी जाहिर करते हुए चीन ने बृहस्पतिवार को कंबोडिया में दक्षिणपूर्व एशियाई देशों के संघ (आसियान) की बैठक से इतर चीन और जापान के विदेश मंत्रियों के बीच होने वाली वार्ता को रद्द कर दिया।

एपी

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