विदेश की खबरें | चीन का आरोप- वाशिंगटन ‘तकनीकी आधिपत्य’ चाहता है
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ब्लूमबर्ग न्यूज, द फाइनेंसियल टाइम्स और वाल स्ट्रीट जर्नल की खबर के मुताबिक संभावित कदम से वर्ष 2019 में लगाया गया प्रतिबंध और कठोर हो जाएगा जिससे प्रोसेसर चिप्स और अन्य तकनीक तक हुवावे की पहुंच सीमित हो जाएगी।

नेटवर्क उपकरण और स्मार्टफोन बनाने वाली इस कंपनी को कुछ कम आधुनिक पुर्जों को खरीदने की अनुमति दी गई थी।

हुवावे टेक्नोलॉजीस लिमिटेड चीन का पहला वैश्विक तकनीकी ब्रांड है, लेकिन तकनीकी और सुरक्षा को लेकर वाशिंगटन और बीजिंग के बीच के संघर्ष के केंद्र में है।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हुवावे से सुरक्षा से जुड़ा जोखिम है और यह चीन को जासूसी करने में मदद कर सकती है। हालांकि, कंपनी इस आरोप से इनकार करती है।

विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि इन खबरों को लेकर चीन गंभीर रूप से चिंतित है।

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