रायपुर, तीन दिसंबर छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भ्रष्टाचार, हिंदुत्व, लोकलुभावन वादों और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मजबूत छवि जैसे मुद्दों लेकर चुनाव लड़ा और 90 में से 54 सीटों पर जीत हासिल कर पांच साल बाद जोरदार वापसी की है।
राज्य में 2018 में भाजपा को कांग्रेस के हाथों बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। इस चुनाव में कांग्रेस 35 सीटें जीतने में सफल रही, जो 2018 में मिली जीत से 33 कम है।एक सीट गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को मिली है।
एग्जिट पोल में पिछड़ने की भविष्यवाणियों के विपरीत भाजपा ने इस चुनाव में अपनी सीटें 15 से बढ़ाकर 54 कर ली है।
2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद यह पहली बार है जब भाजपा को इतना बड़ा जनादेश मिला है तथा वह 50 सीटों से आगे निकल गई है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाले 13 सदस्यीय मंत्रिमंडल के नौ सदस्य चुनाव हार गए हैं, जबकि बघेल (पाटन) और उनके तीन मंत्री कवासी लखमा (कोंटा), उमेश पटेल (खरसिया) और अनिला भेंडिया (डोंडी लोहारा) विजयी होने में कामयाब रहे।
राज्य विधानसभा के अध्यक्ष चरण दास महंत ने अपनी सक्ती सीट जीत ली है। वहीं, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज को चित्रकोट सीट पर हार का सामना करना पड़ा।
भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह (राजनांदगांव), राज्य भाजपा प्रमुख और पार्टी सांसद अरुण साव (लोरमी), केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह (भरतपुर-सोनहत), पार्टी सांसद गोमती साय (पत्थलगांव), पूर्व केंद्रीय मंत्री विष्णु देव साय (कुनकुरी) और पूर्व मंत्री जिनमें बृजमोहन अग्रवाल (रायपुर शहर दक्षिण), अजय चंद्राकर (कुरुद), पुन्नूलाल मोहिले (मुंगेली), अमर अग्रवाल (बिलासपुर), दयालदास बघेल (नवागढ़) और राजेश मूणत (रायपुर शहर पश्चिम) तथा पूर्व आईएएस अधिकारी ओपी चौधरी और नीलकंठ टेकाम चुनाव जीत गए हैं।
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