जरुरी जानकारी | दिल्ली में 2,000 रुपये के नोट बदलने के पहले दिन अफरा-तफरी का माहौल
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नयी दिल्ली, 23 मई राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 2,000 रुपये के नोट बदलने के पहले दिन अफरा-तफरी का माहौल रहा और कई जगह पूरी प्रक्रिया को लेकर भ्रम भी रहा।
कुछ लोगों ने यह शिकायत भी की कि बैंकों ने नोट बदलने की जगह उन्हें खातों में जमा करने का दबाव बनाया और उनसे पहचान पत्र भी मांगा, जबकि मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि इसकी कोई जरूरत नहीं है।
वाणिज्यिक बैंकों की शाखाओं पर हालांकि सुबह ज्यादा भीड़ नहीं थी, लेकिन बाद में लंबी कतारें दिखाई देने लगीं। इस दौरान बुजुर्ग नागरिकों के बीच खासतौर से चिंता देखने को मिली। कई ग्राहकों ने असंतोष जताया।
इन नोटों को बदलने या जमा करने की सुविधा 30 सितंबर तक उपलब्ध होगी, लेकिन पहले दिन ही बड़ी संख्या में लोग बैंकों में पहुंचे।
दिल्ली में चल रही भीषण गर्मी ने स्थिति को और खराब कर दिया। खासतौर से बुजुर्गों को परेशानी हुई और उन्होंने घंटों इंतजार करने की शिकायत की।
पंजाब नेशनल बैंक की लाजपत नगर शाखा में लोगों और कर्मचारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कतार में लगीं शिवानी गुप्ता ने कहा, ‘‘अधिकारियों को इससे होने वाली भारी असुविधा का अनुमान लगाना चाहिए था। इस चिलचिलाती गर्मी में खड़े रहना हम पर भारी पड़ रहा है, खासकर बुजुर्गों पर।’’
दूसरी ओर पेट्रोल पंपों पर 2,000 रुपये के नोट का इस्तेमाल करने की कोशिश में भी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने शिकायत की कि एटीएम से अब भी 2,000 रुपये के नोट निकल रहे हैं, लेकिन इन्हें लेने के लिए कोई तैयार नहीं है।
एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी राजेंद्र सिंह ने कहा, ‘‘कुछ लोगों से कहा जा रहा है कि नोट बदलने की जगह उन्हें खातों में जमा करें। इससे लोग ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।’’
कतार में खड़े एक अन्य असंतुष्ट ग्राहक ने कहा, ‘‘बैंकों को इस स्थिति के लिए बेहतर तरीके से तैयार रहना चाहिए था। उन्हें 2,000 रुपये के नोटों को जमा करने के लिए कहने के बजाय बदलने के लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए थी।’’
संसद मार्ग पर स्थित आरबीआई भवन के बाहर तैनात एक सुरक्षा गार्ड ने कहा, ‘‘करीब 25 लोग अपने 2,000 रुपये के नोट बदलने के लिए अब तक आए हैं। यहां व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है।’’
पिछली बार 2016 में हुई नोटबंदी से अलग इस बार 2,000 रुपये के नोट कानूनी रूप से वैध बने हुए हैं। इसबीच आरबीआई ने बैंकों को सलाह दी है कि वे 2,000 रुपये का नोट बदलने या जमा करने आए लोगों को धूप के बचाने के लिए ‘शेड’ का इंतजाम करें। साथ ही कतार में लगे लोगों के लिए पीने के पानी की भी व्यवस्था की जाए।
उल्लेखनीय है कि 2016 में नोटबंदी के दौरान बैंकों में नोट बदलने के लिए कतारें लगी थीं और आरोप है कि इस दौरान कई ग्राहकों की मृत्यु भी हो गई थी। गत शुक्रवार को 2,000 रुपये के नोटों को वापस लेने की घोषणा के बावजूद यह वैध मुद्रा बना रहेगा। 2016 में नोटबंदी की घोषणा के बाद ऐसा नहीं था।
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