देश की खबरें | विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के पद को निरस्त करने के फैसले को अदालत में चुनौती

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य लाल बिहारी यादव ने इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ खंडपीठ में एक रिट याचिका दाखिल करते हुए विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष पद की उनकी मान्यता समाप्त करने के फैसले को चुनौती दी है।

लखनऊ, 18 जुलाई समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य लाल बिहारी यादव ने इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ खंडपीठ में एक रिट याचिका दाखिल करते हुए विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष पद की उनकी मान्यता समाप्त करने के फैसले को चुनौती दी है।

इस मामले की सुनवाई बुधवार को होगी। सोमवार को उनकी याचिका सुनवाई के लिए पेश हुई व विधान परिषद की ओर से पेश अधिवक्ता को याचिका की प्रति मुहैया कराई गई। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए 20 जुलाई की तारीख तय की है।

यह आदेश न्यायमूर्ति एआर मसूदी व न्यायमूर्ति एनके जौहरी की खंडपीठ ने दिया। न्यायालय ने याची की ओर से पेश अधिवक्ता कृष्ण कन्हैया पाल व विधान परिषद की ओर से पेश अधिवक्ता ललित शुक्ला को मामले से जुड़े सम्बंधित कानूनी प्रावधानों को भी लाने के निर्देश दिए हैं।

याचिका में कहा गया है कि याची विधान मंडल के उच्च सदन का वर्ष 2020 से निर्वाचित सदस्य है। इसी वर्ष 27 मई को उसे विधान परिषद का नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था, लेकिन सात जुलाई को प्रमुख सचिव, विधान परिषद ने एक अधिसूचना जारी करते हुए, नेता प्रतिपक्ष के तौर पर याची की मान्यता समाप्त कर दी।

उक्त अधिसूचना में कहा गया है कि उच्च सदन में सपा सदस्यों की संख्या मात्र नौ रह गई है जबकि नेता प्रतिपक्ष के तौर पर मान्यता के लिए न्यूनतम 10 सदस्यों की आवश्यकता होती है। याची की ओर से इस आदेश को मनमानापूर्ण बताते हुए, इसे रद्द करने की मांग की गई है।

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