चक्का जाम: दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, कुछ घंटे 10 मेट्रो स्टेशन बंद रखे गये

प्रदर्शन स्थलों पर नजर रखने के लिये दिल्ली पुलिस ने ड्रोन कैमरों का भी इस्तेमाल किया. मंडी हाउस और आईटीओ समेत दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों को दोपहर 12 बजे से अपराह्न तीन बजे तक चक्का जाम के दौरान बंद रखा गया और प्रदर्शन खत्म होने के बाद खोला गया.

6 फरवरी को होगा चक्का जाम (Photo Credits: PTI)

नयी दिल्ली, छह फरवरी: प्रदर्शनकारी किसानों ने शनिवार दोपहर तीन घंटे का देशव्यापी चक्का जाम किया. हालांकि, संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रीय राजधानी को इससे बाहर रखने की घोषणा की गई थी, लेकिन प्रशासन ने यहां सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किये गए थे. प्रदर्शन के दौरान दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर प्रवेश एवं निकास बंद रखे गये. इसके अलावा, किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिये दिल्ली पुलिस के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों और अन्य बलों की भी तैनाती की गई थी.

प्रदर्शन स्थलों पर नजर रखने के लिये दिल्ली पुलिस ने ड्रोन कैमरों का भी इस्तेमाल किया. मंडी हाउस और आईटीओ समेत दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों को दोपहर 12 बजे से अपराह्न तीन बजे तक चक्का जाम के दौरान बंद रखा गया और प्रदर्शन खत्म होने के बाद खोला गया.

किसानों के 'चक्का जाम' के आह्वान के समर्थन में कथित रूप से प्रदर्शन करने को लेकर शनिवार को मध्य दिल्ली के शहीदी पार्क के पास 50 व्यक्तियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. केंद्र के नये कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों के समूह संयुक्त किसान मोर्चा ने शुक्रवार को कहा कि 'चक्का जाम' के दौरान प्रदर्शनकारी दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में सड़कों को अवरुद्ध नहीं करेंगे.

मोर्चा ने साथ ही यह भी कहा था कि प्रदर्शनकारी देश में दोपहर 12 बजे से अपराह्न तीन बजे के बीच तीन घंटे के लिए राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों को अवरुद्ध करेंगे लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से. गणतंत्र दिवस के दिन ‘ट्रैक्टर परेड’ के दौरान हुई हिंसा में 500 पुलिसकर्मियों के घायल होने और एक प्रदर्शनकारी की मौत के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने इस बार सुरक्षा के अतिरिक्त उपाय किये थे और सुरक्षा बढ़ाने के साथ ही शहर के अंदर और शहर की सीमा पर कड़ी निगरानी रखी जा रही थी.

गणतंत्र दिवस के दिन प्रदर्शनकारी किसानों द्वारा आयोजित ‘ट्रैक्टर परेड’ के दौरान बड़े पैमाने पर हुई हिंसा के गवाह रहे लाल किले और आईटीओ समेत राष्ट्रीय राजधानी के सभी अहम क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी.

बहुस्तरीय बैरीकेड, कंटीले तार और प्रदर्शन स्थल पर सड़क पर कील लगाकर पुलिस की तरफ से ऐहतियाती उपाय किये गए थे. अधिकारियों ने बताया कि पुलिस सोशल मीडिया पर भी निगरानी कर रही थी जिससे अफवाह फैलाने वालों पर लगाम लगाई जा सके. इससे पहले सुबह डीएमआरसी ने कई ट्वीट कर यात्रियों को सूचित किया था कि कई स्टेशनों को बंद कर दिया गया है.

उसने ट्वीट किया, “मंडी हाउस, आईटीओ और दिल्ली गेट के प्रवेश/निकास द्वार बंद हैं.” बाद में की गई ट्वीट में कहा गया कि विश्ववद्यालय स्टेशन के प्रवेश और निकास द्वार भी बंद कर दिए गए हैं. डीएमआरसी ने कहा, “लाल किला, जामा मस्जिद, जनपथ और केंद्रीय सचिवालय के प्रवेश/निकास द्वार बंद हैं. इंटरचेंज सुविधा उपलब्ध है.“

एक और ट्वीट में कहा गया था, ‘‘खान मार्केट और नेहरू प्लेस के प्रवेश/निकास द्वार बंद हैं.’’

हालांकि शाम को डीएमआरसी ने ट्वीट किया कि सभी 10 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार फिर से खोल दिए गए हैं और सामान्य सेवा को फिर से शुरू कर दिया गया है. उसने ट्वीट किया, “सभी स्टेशनों के प्रवेश/निकास द्वार खुले हैं. सामान्य सेवा फिर से बहाल हो गई है.“

तीन प्रमुख प्रदर्शन स्थलों जहां किसान बीते 70 दिनों से भी ज्यादा समय से प्रदर्शन कर रहे हैं वहां सबकुछ आम दिनों की तरह ही था और शनिवार को चक्का-जाम को लेकर यहां ज्यादा गहमा-गहमी नहीं दिखी.

पुलिस उपायुक्त (पूर्व) दीपक यादव ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने हालांकि कहा था कि वे राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश नहीं करेंगे, लेकिन सुरक्षा बलों ने एहतियाती उपाय के तौर पर कानून-व्यवस्था बरकरार रखने के लिये पर्याप्त इंतजाम किये थे.

उन्होंने कहा, “सभी सीमा बिंदुओं पर अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था.” उन्होंने कहा, “सभी सीमा बिन्दुओं पर अतिरिक्त चौकी बनाई गई हैं. चौकियों और सीमाओं के सभी प्रवेश और निकास बिन्दुओं पर वाहनों की सघन जांच की जा रही है. अतिरिक्त बसें पहले ही लगाई जा चुकी हैं और शहर में चौकियों पर अतिरिक्त अवरोधक लगाए गए थे.”

इस बीच, हरियाणा के कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे पर हजारों किसानों ने यातायात को बाधित किया. मार्ग पर वाहन से आने वाले लोगों को विनम्रतापूर्वक चक्का जाम की सूचना देने के बाद उनसे वापस लौट जाने का अनुरोध किया गया. प्रदर्शनकारी किसानों को बिस्किट और फल भी बांटे गये.

आंदोलन का समर्थन कर रहे एक स्थानीय किसान ने इससे पहले दिन में बताया, “मैं यहां पूर्वाह्न 11 बजे आया था. तब यहां बहुत कम लोग थे लेकिन कुछ ही समय में लोग जुटने शुरू हो गए और अब यह भर चुका है. उद्देश्य शांतिपूर्ण रहने का है और जो हमारे नेताओं ने कहा है- तीन बजे तक रास्ता बंद करना- वह करना है.”

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