देश की खबरें | केंद्र की वन्यजीव समिति ने पूर्वी लद्दाख में रणनीतिक बुनियादी ढांचे के निर्माण को मंजूरी दी
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नयी दिल्ली, 10 जनवरी केंद्र की वन्यजीव समिति ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास पूर्वी लद्दाख में सैनिकों, गोला-बारूद भंडारण और संचार नेटवर्क के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण के कई प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। आधिकारिक रिकॉर्ड से यह जानकारी मिली।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, चांगथांग के अधिक ऊंचाई वाले शीत मरुस्थल वन्यजीव अभयारण्य और काराकोरम नुब्रा श्योक वन्यजीव अभयारण्य में विकसित किए जाने वाले नए बुनियादी ढांचे का उद्देश्य गोला-बारूद की पहुंच में तेजी लाना और त्वरित अभियानगत तैनाती सुनिश्चित करना है।
भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में 54 महीने तक सैन्य गतिरोध रहा, जो मई 2020 में गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प के बाद शुरू हुआ था। यह गतिरोध पिछले साल अक्टूबर में समाप्त हुआ था। 21 दिसंबर को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की बैठक के दौरान इस रणनीतिक बुनियादी ढांचे के प्रस्तावों पर चर्चा की गई।
प्रस्तावों के तहत आने वाले दोनों अभयारण्य दुर्लभ वन्यजीवों का निवास स्थान हैं।
रक्षा अवसंरचना के लिए निर्धारित स्थान संरक्षित क्षेत्रों की श्रेणी में आते हैं, जिससे वे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 29 के अधीन हो जाते हैं।
रक्षा मंत्रालय को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि इस क्षेत्र को कोई नुकसान न पहुंचे और वन्यजीवों के स्थानीय आवासों पर परियोजना के प्रभाव को कम करने के लिए विनियमों का अनुपालन किया जाए।
अब तक, स्थायी समिति ने चांगथांग के अधिक ऊंचाई वाले शीत मरुस्थल वन्यजीव अभयारण्य में 2,967.63 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हुए 107 प्रस्तावों और काराकोरम नुब्रा श्योक वन्यजीव अभयारण्य में 24,625.52 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हुए 64 प्रस्तावों को मंजूरी दी है।
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(The above story first appeared on LatestLY on Jan 10, 2025 04:28 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

