देश की खबरें | केंद्र लिंगानुपात असंतुलन दूर करने के लिए पीसीपीएनडीटी अधिनियम में संशोधन पर राज्यों से सुझाव लेगा

देहरादून, 15 जुलाई केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने शनिवार को कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें लिंगानुपात असंतुलन दूर करने के लिए ‘मिशन मोड’ में काम करेंगी। साथ ही उन्होंने सभी स्वास्थ्य योजनाओं के व्यापक कवरेज को सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि यहां स्वास्थ्य चिंतन शिविर में देशभर में लिंगानुपात असंतुलन से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा की गई।

मंत्री ने उत्तराखंड की राजधानी में दो दिवसीय सम्मेलन के आखिरी दिन कहा, ‘‘यह निर्णय लिया गया है कि केंद्र और राज्य इस मुद्दे के समाधान के लिए ‘मिशन मोड’ में काम करेंगे।’’

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम, 1994 में संशोधन के लिए राज्यों से सुझाव मांगेगा ताकि लिंगानुपात असंतुलन को दूर करने के लिए जमीनी स्तर पर इसको प्रभावी रूप से अमल में लाया जा सके।

सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) डेटा के मुताबिक जन्म के समय भारत का लिंग अनुपात 2017-2019 में प्रति हजार पुरुषों पर 904 महिलाओं से बढ़कर 2019-2020 में 907 हो गया। 2014-2016 में यह आंकड़ा 898 दर्ज किया गया था।

शिविर में राज्यों को विशाल नामांकन अभियान शुरू करने के साथ-साथ अंग दान को बढ़ावा देकर आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई के तहत 100 प्रतिशत कवरेज पर ध्यान केंद्रित करने के लिए भी कहा गया था।

मांडविया ने उम्मीद जताई कि स्वास्थ्य चिंतन शिविर (केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद का 15वां सम्मेलन) इस पर सुझाव देगा कि मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं को देशभर में कैसे बढ़ाया जाए।

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