देश की खबरें | भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए मुआवजे पर अपना अपना रुख स्पष्ट करे केंद्र: न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र सरकार से भोपाल गैस त्रासदी से संबंधित एक याचिका पर रुख स्पष्ट करने के लिए कहा।

नयी दिल्ली, 20 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र सरकार से भोपाल गैस त्रासदी से संबंधित एक याचिका पर रुख स्पष्ट करने के लिए कहा।

अदालत ने सरकार से पूछा कि क्या वह क्या वह 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए अमेरिका में स्थित यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन (यूसीसी) की उत्तराधिकारी कंपनियों से अतिरिक्त धनराशि के रूप में 7,844 करोड़ रुपये की मांग करने वाली अपनी उपचारात्मक याचिका पर आगे बढ़ना चाहती है।

न्यायमूर्ति एस. के. कौल की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को निर्देश लेने के लिए कहा और मामले की सुनवाई 11 अक्टूबर को तय की।

पीठ में न्यामूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति ए. एस. ओका, न्यामयूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी भी शामिल थे।

पीठ ने कहा, “सरकार को अपना रुख तय करना होगा कि वह उपचारात्मक याचिका पर आगे बढ़ेगी या नहीं।”

पीड़ितों की ओर से पेश अधिवक्ता करुणा नंदी ने कहा कि अदालत को सरकार के फैसले से परे प्रभावित पक्षों को सुनना चाहिए।

पीड़ितों के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने कहा कि प्रभावित लोगों की संख्या पांच गुना बढ़ गई है और सुनवाई शुरू होनी चाहिए।

अब ‘डॉव केमिकल्स’ के स्वामित्व वाली यूसीसी ने भोपाल गैस त्रासदी मामले में 470 मिलियन अमेरिकी डॉलर (1989 में निपटान के समय 715 करोड़ रुपये) का मुआवजा दिया दिया था।

उल्लेखनीय है कि 2 और 3 दिसंबर 1984 की मध्यरात्रि को यूनियन कार्बाइड कारखाने से जहरीली ‘मिथाइल आइसोसाइनेट’ गैस रिसने के बाद 3,000 से अधिक लोग मारे गए थे और 1.02 लाख से अधिक प्रभावित हुए थे।

इस त्रासदी में जिन लोगों की जान बची वे जहरीली गैस के रिसाव के कारण बीमारियों का शिकार हो गए। वे पर्याप्त मुआवजे और उचित चिकित्सा उपचार के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं।

केंद्र ने मुआवजा राशि बढ़ाने के लिए दिसंबर 2010 में शीर्ष अदालत में सुधारात्मक याचिका दाखिल की थी।

सात जून 2010 को भोपाल की एक अदालत ने यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के सात अधिकारियों को दो साल के कारावास की सजा सुनाई थी।

यूसीसी के तत्कालीन अध्यक्ष वारेन एंडरसन मामले में मुख्य आरोपी थे, लेकिन मुकदमे के लिए उपस्थित नहीं हुए थे। एक फरवरी 1992 को भोपाल सीजेएम अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया था।

भोपाल की अदालतों ने 1992 और 2009 में दो बार एंडरसन के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। सितंबर 2014 में उनकी मृत्यु हो गई थी।

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