देश की खबरें | केंद्र ने प्रवासी बच्चों के मद्देनजर राशन और पोषण का लाभ सार्वभौमिक करने का प्रस्ताव दिया

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(उज्मी अतहर)

केवडिया (गुजरात), 18 जून केंद्र सरकार ने राज्यों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि बच्चे, खासकर एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने वाले प्रवासी माता-पिता के बच्चे, आंगनवाड़ी केंद्रों से राशन पाने के लाभ से वंचित ना रहें। केंद्र ने राज्यों से कहा है कि वे लाभार्थियों को इसके डिजिटल कुपोषण मापक टूल ‘पोषण ट्रैकर ऐप’ से जोड़ें ताकि पोषण की पहुंच को सार्वभौमिक बनाया जा सके।

इस प्रस्ताव की उपयोगिता को स्पष्ट करते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (डब्ल्यूसीडी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अक्सर यह देखने को मिलता है कि जब बच्चे अपने कामगार माता-पिता के साथ एक राज्य से दूसरे राज्य में पहुंचते हैं, तो वह आंगनवाड़ी के उन लाभों से वंचित हो जाते हैं जो पूर्व राज्य में उन्हें मिल रहे थे।

अधिकारी ने कहा, ‘‘इसलिए महिला एवं बाल विकास (डब्ल्यूसीडी) मंत्रालय का प्रस्ताव है कि आंगनवाड़ी सेवाओं का ‘पोषण ट्रैकर ऐप’ के जरिये डिजिटलीकरण किया जाए, ताकि पोषण तक प्रवासी बच्चों की पहुंच पर नजर रखी जा सके।’’

डब्ल्यूसीडी की उपक्षेत्रीय (सब-जोनल) बैठक में अधिकारी ने कहा कि इसके पीछे विचार यह है कि जब लाभार्थी एक राज्य से दूसरे राज्य में जाएंगे तो उनका ब्योरा ‘पोषण ट्रैकर ऐप’ के जरिये अद्यतन किया जाएगा, ताकि वह अपने इलाके के आंगनवाड़ी केंद्र से जुड़कर राशन पा सकें।

अधिकारी ने कहा कि इसके पहले डिजिटल संपर्क के अभाव में लाभार्थियों को अपने सभी दस्तावेज नये आंगनवाड़ी केंद्र ले जाने पड़ते थे, जहां हाथ से ब्योरा दर्ज किया जाता था। लेकिन इसके कारण बहुत से लाभार्थी बच्चों के लिए राशन के लाभ से वंचित हो जाते थे।

अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय ने राज्यों को ‘आधार किट’ की भी आपूर्ति की है जिसे बाल विकास परियोजना के सभी अधिकारियों को दिया जायेगा ताकि बच्चों को उनका आधार कार्ड मिल सके और बच्चे सरकारी योजनाओं और पोषण ट्रैकर से जुड़ सकें।

अधिकारी ने कहा कि पोषण-2 के माध्यम से पोषण की सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित की गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आपका लाभ किसी विशेष आंगनवाड़ी तक सीमित नहीं रहे। सरकार ने ‘पोषण ट्रैकर ऐप’ लॉन्च किया है, जिसके इस्तेमाल से आंगनबाड़ी बच्चे के वजन और ऊंचाई जैसे घटकों के आधार पर यह पता लगाया जाता है कि वह कुपोषित है या नहीं और फिर वांछित उपचार प्रदान किया जाता है।

अधिकारी ने कहा कि भोजन के पैकेट या घर ले जाने के लिए राशन को भी पोषण ट्रैकर से जोड़ा गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भोजन-राशन लाभार्थी तक पहुंच रहा है।

एनएफएचएस-5 के अनुसार वर्ष 2019-21 में पांच साल से कम उम्र के 35.5 फीसदी बच्चे अविकसित और 32.1 फीसदी कम वजन के थे।

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