देश की खबरें | केंद्र ने रिहायशी और वाणिज्यिक निर्माण स्थलों के 10 प्रतिशत हिस्से में वृक्ष लगाने का प्रस्ताव किया

नयी दिल्ली, पांच मार्च केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने प्रत्येक 80 वर्ग मीटर स्थान में कम से कम एक वृक्ष लगाने का प्रस्ताव किया है ताकि रिहायशी और वाणिज्यिक निर्माण स्थलों के कुल क्षेत्र का कम से कम 10 प्रतिशत क्षेत्र हरियाली युक्त हो।

मंत्रालय ने 28 फरवरी को जनता से सुझाव और आपत्तियां प्राप्त करने के लिए ‘‘इमारत निर्माण पर्यावरण प्रबंधन नियामक-2022’ की मसौदा अधिसचूना जारी की। जनता और हितधारक 60 दिनों में अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।

यह नियम पांच हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल की नयी इमारत परियोजनाओं, पुरानी बनी इमारतों के पनरुद्धार या मरम्मत की स्थिति में लागू होगा।

मसौदा अधिसूचना में कहा गया, ‘‘कम से कम प्रति 80 वर्ग मीटर क्षेत्र में एक पौधे को रोपा जाना चाहिए और उसकी देखभाल की जानी चाहिए ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि प्लॉट के कम से कम 10 प्रतिशत इलाकें में पेड़ हो। इस संदर्भ में मौजूदा पेड़ों को भी गिना जाएगा।’’

मसौदा में कहा गया है कि मिट्टी की ऊपरी परत को केवल 20 सेंटीमीटर तक की गहराई से इमारत, सड़क, रास्ते या अन्य बाहरी सेवाओं से लिए हटाया जा सकता है। हटाई गई मिट्टी निर्धारित स्थान पर रखी जानी चाहिए और उनका इस्तेमाल प्रस्तावित स्थान पर वृक्षारोपण के लिए किया जाना चाहिए।

मंत्रालय ने कहा कि दलदली इलाकों और जलाशयों पर किसी भी निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी और निर्माण के लिए भूजल का इस्तेमाल केंद्रीय भू जल प्राधिकरण की बिना पूर्व अनुमति नहीं किया जा सकेगा।

मसौदा के मुताबिक खुले स्थान का 20 प्रतिशत हिस्सा बिना कंक्रीट का होना चाहिए और कम से कम 50 प्रतिशत बिना कंक्रीट वाले रास्ते भी इस श्रेणी में माने जाएंगे।

मसौदे में कहा गया, ‘‘जलापूर्ति की दोहरी व्यवस्था होनी चाहिए। एक पीने, खाना बनाने और नहाने आदि के लिए पानी की आपूर्ति करने के लिए और दूसरी शौचालय में डॉलने के लिए शोधित जल। शोधित जल का इस्तेमाल शौचालय में ही किया जाना चाहिए।’’

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