देश की खबरें | केंद्र को एकाम्र क्षेत्र मंदिरों के लिए एनएमए उपनियमों को वापस लेना चाहिए: ओडिशा सरकार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. ओडिशा सरकार ने यहां एकाम्र क्षेत्र में अनंत वासुदेव और ब्रह्मेश्वर मंदिरों के लिए राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (एनएमए) द्वारा जारी मसौदा उपनियमों को रद्द किए जाने की केंद्र सरकार से सोमवार को अपील की।
भुवनेश्वर, 15 फरवरी ओडिशा सरकार ने यहां एकाम्र क्षेत्र में अनंत वासुदेव और ब्रह्मेश्वर मंदिरों के लिए राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (एनएमए) द्वारा जारी मसौदा उपनियमों को रद्द किए जाने की केंद्र सरकार से सोमवार को अपील की।
इससे एक सप्ताह पहले केंद्र ने पुरी में श्री जगन्नाथ मंदिर के लिए नियमों को वापस ले लिया था।
राज्य के मुख्य सचिव सुरेश चंद्र महापात्र ने एक पत्र लिखकर केंद्रीय संस्कृति सचिव रघुवेंद्र सिंह से इस संबंध में अनुरोध किया। उन्होंने आशंका जताई कि यदि तत्काल कोई कदम नहीं उठाया गया, तो व्यापक स्तर पर प्रदर्शन हो सकते हैं।
महापात्र ने कहा कि एनएमए ने पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर और भुवनेश्वर स्थित एकाम्र क्षेत्र के अनंत वासुदेव एवं ब्रह्मेश्वर मंदिरों के लिए मसौदा विरासत उपनियम की अधिसूचना जनवरी में जारी की थी।
उन्होंने कहा कि इसके कारण मंदिरों के सेवकों, श्रद्धालुओं एवं लोगों के बीच असंतोष पैदा हो गया है, क्योंकि इन्हें पक्षकारों से विचार-विमर्श किए बिना प्रकाशित किया गया।
मुख्य सचिव ने कहा, ‘‘एनएमए ने इसके मद्देनजर पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर संबंधी उपनियमों को वापस ले लिया है।’’
उन्होंने कहा कि लेकिन यहां एकाम्र क्षेत्र के मंदिरों संबंधी नियमों को वापस नहीं लिया गया, जिसके कारण सेवकों और श्रद्धालुओं समेत लोगों में व्यापक असंतोष है।
ये उपनियम ‘प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम -2010’ के तहत संरक्षित स्मारकों के 100 से 300 मीटर के दायरे में निर्माण को प्रतिबंधित करते हैं और उनके नियमन की बात करते हैं।
महामात्र ने कहा कि मसौदा अधिसूचना वापस नहीं लिए जाने के कारण प्रदर्शन हो रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मंदिरों में इस प्रकार के माहौल से लाखों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर 11 मार्च को एकाम्र क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होंगे।’’
महापात्र ने कहा कि इस प्रकार के उत्सव के आयोजन के लिए शांतिपूर्ण वातावरण एवं सेवकों के पूर्ण सहयोग की आवश्यकता है।
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