नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केन्द्र और रिजर्व बैंक से कहा कि वे कोविड-19 की वजह से विभिन्न क्षेत्रों पर पड़े दबाव के मद्देनजर कर्ज पुनर्गठन के बारे में के वी कामत समिति की सिफारिशों और कर्ज की किस्त स्थगन के मुद्दे पर उनके द्वारा जारी अधिसूचनाएं और परिपत्र उसके समक्ष प्रस्तुत करें।
शीर्ष अदालत ने ये निर्देश महामारी की वजह से छह महीने के लिये ऋण की किस्त स्थगन की घोषणा के तहत दो करोड़ रुपये तक के व्यक्तिगत कर्ज तथा छोटे एवं मझोले उद्योगों के कर्ज पर चक्रवृद्धि ब्याज माफ कर उन्हें राहत देने के वित्त मंत्रालय के निर्देश के बाद दिये हैं।
न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ आरबीआई की किस्त स्थगन की योजना के तहत एक मार्च से 31 अगस्त के दौरान कर्जदारों की बकाया मासिक किस्तों (ईएमआई) पर बैंकों द्वारा ब्याज लगाए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने रियल एस्टेट जैसे विभिन्न क्षेत्रों को केन्द्र द्वारा नये प्रस्ताव में कोई राहत नहीं दिये जाने के मामले पर भी विचार किया।
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कामत समिति ने 26 क्षेत्रों के लिये सिफारिश की थी, जिनके बारे में कर्ज देने वाली संस्थाओं को कर्ज समाधान योजना को अंतिम रूप देते समय ध्यान में रखना था और उसने कहा था कि बैंक किसी भी क्षेत्र में कोरोना वायरस के असर की गंभीरता के आधार पर निर्णय ले सकते हैं।
शीर्ष अदालत ने केन्द्र और आरबीआई से कहा है कि एक सप्ताह के भीतर कर्ज की किस्त स्थगन के मसले पर सिफारिशें और फैसले तथा अधिसूचना आदि पेश किये जायें। न्यायालय ने कहा कि रियल एस्टेट एसोसिएशनों और बिजली उत्पादकों द्वारा उठाये गये मुद्दों पर भी विचार किया जायेगा।
इस बीच, भारतीय बैंक संघ, कंफेडरेशन आफ रियल एस्टेट डिवलेपर्स एसोसिएशन और अन्य पक्षकारों को न्यायालय ने केन्द्र के हलफनामें पर अपने अपने जवाब दाखिल करने की छूट दी है।
रियल एस्टेट क्षेत्र की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी ए सुन्दरम ने कहा कि इस क्षेत्र को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।
एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल नेकहा कि वह केन्द्र के जवाब पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करना चाहते हैं क्योंकि कुछ तथ्यों पर विचार करने की आवश्यकता है।
सरकार ने अपने हलफनामे में कहा था कि वह इस संबंध में अनुदान के लिये संसद से मंजूरी प्राप्त करेगी और उसका यह प्रयास एमएएमई के लिये 3.7 लाख करोड़ रुपये के समर्थन के अतिरिक्त होगा।
यह पूछे जाने पर कि बैंक योजना को कैसे और कब लागू करेंगे, आईबीए की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि आरबीआई के इस मुद्दे पर परिपत्र जारी करने के बाद बैंक 24 घंटे के भीतर जरूरी कदम उठाएंगे।
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