जरुरी जानकारी | केन्द्र ने जीएसटी क्षतिपूर्ति के राज्यों को दिये दो विकल्प, पंजाब, दिल्ली ने जताई असहमति

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. गैर-राजग शसित राज्यों की जीएसटी क्षतिपूर्ति तुरंत किये जाने की मांग के बीच केंद्र ने बृहस्पतिवार को जीएसटी राजस्व में आई कमी की भरपाई के लिये राज्यों को दो विकल्प दिये। इसके तहत राज्य भविष्य में होने वाले कर प्राप्ति के एवज में बाजार से कर्ज ले सकते हैं। हालांकि, पंजाब और दिल्ली ने इस पर अपनी असहमति जता दी है।

नयी दिल्ली, 27 अगस्त गैर-राजग शसित राज्यों की जीएसटी क्षतिपूर्ति तुरंत किये जाने की मांग के बीच केंद्र ने बृहस्पतिवार को जीएसटी राजस्व में आई कमी की भरपाई के लिये राज्यों को दो विकल्प दिये। इसके तहत राज्य भविष्य में होने वाले कर प्राप्ति के एवज में बाजार से कर्ज ले सकते हैं। हालांकि, पंजाब और दिल्ली ने इस पर अपनी असहमति जता दी है।

केंद्र ने चालू चालू वित्त वर्ष में जीएसटी राजस्व प्राप्ति में 2.35 लाख करोड़ रुपये की कमी का रहने का अनुमान लगाया है।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी परिषद की पांच घंटे चली बैठक के बाद कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण राजस्व में कमी बढ़ी है और इसकी भरपाई के लिये कर की दरें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

उन्होंने महान्यायवादी की कानूनी राय का हवाला देते हुए केंद्र सरकार के अपने कोष से या अपने खाते में कर्ज लेकर राजस्व की भरपाई की संभावना को खारिज कर दिया।

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केंद्र ने जीएसटी लागू करनेकी वजह से और कोविड-19 संकट के कारण आर्थिक नरमी से होने वाले राजस्व नुकसान के बीच अंतर को भी स्पष्ट किया। सरकार ने कहा कि उसकी कानूनी बाध्यता केवल जीएसटी के कारण राजस्व में हुए नुकसान की भरपाई करने की है।

वित्त मंत्री ने कहा कि घाटे की भरपाई राज्य विशेष खिड़की का उपयोग करते हुये कर्ज लेकर कर सकते हैं। इस कर्ज को पांच साल बाद जीएसटी उपकर संग्रह से लौटाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि राज्य जीएसटी को लागू करने के कारण राजस्व में आयी 97,000 करोड़ रुपये की कमी को या पूरी 2.35 लाख करोड़ रुपये की राशि बाजार से कर्ज ले सकते हैं।

अगर राज्य इन विकल्पों में से किसी एक पर सहमत होते हैं, तो इसका मतलब होगा कि उपकर जीएसटी क्रियान्वयन के पांच साल बाद भी जारी रहेगा।

इस बीच, पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने कहा कि केंद्र ने जो समाधान सुझाए हैं, वह राज्य को स्वीकार्य नहीं है। बादल ने कहा, ‘‘समाधान के तहत इस बात पर जोर है कि केंद्र गारंटी देगा और राशि का भुगतान क्षतिपूर्ति उपकर से किया जाएगा जो 2-3 साल और जारी रहेगा। यह पंजाब को स्वीकार्य नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि राज्य को क्षतिपूर्ति मद में 6,500 करोड़ रुपये की राशि चाहिये।

वहीं, दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि मौजूदा प्रशासनिक ढांचे के तहत दिल्ली सरकार आरबीआई से कर्ज नहीं ले सकती। केंद्र को 21,000 करोड़ रुपये के घाटे को पूरा करने के लिये स्वयं कदम उठाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र ने वादा किया था कि 14 प्रतिशत वृद्धि के हिसाब से राज्यों के राजस्व में यदि कमी आती है, तो वह पांच साल तक उसकी भरपाई करेगा। लेकिन केंद्र ने आज इससे इनकार कर दिया। उनक कहना है कि महामारी जैसी स्थिति में क्षतिपूर्ति के लिये कोई प्रावधान नहीं है।’’

केरल, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे गैर-राजग शासित राज्यों ने केंद्र की क्षतिपूर्ति करने की बाध्यता पर मजबूती से अपनी राय रखी। हालांकि, सीतारमण ने कहा कि बृहस्पतिवार को हुई जीएसटी परिषद की बैठक को राजनीतिक रंग देने का कोई प्रयास नहीं कहीं से नहीं दिखा।

उन्होंने कहा, ‘‘एक चिंता थी कि हम सभी को राजस्व नुकसान के एवज में क्षतिपूर्ति मिले... राजनीतिकरण नहीं हुआ। चिंता थी और विकल्प पेश कर चिंता को दूर करने का प्रयास किया गया।’’

वित्त मंत्री ने कहा कि लेकिन बाहर निश्चित रूप से इसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास हुआ है।

वर्ष 2017 में सभी राज्य वैट समेत अपने स्थानीय करों को समाहित कर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने पर सहमत हुए थे। इसके एवज में केंद्र ने पांच साल तक राजस्व में किसी भी प्रकार की कमी की भरपाई का वादा किया था।

राजस्व सचिव अजय भूषण पांडे ने कहा कि 97,000 करोड़ रुपये की कमी जीएसटी क्रियान्वयन की वजह से जबकि शेष का कारण कोविड-19 का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव है।

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