देश की खबरें | कोविड-19 मरीजों के इलाज में सिद्ध के प्रयोग पर अध्ययन शुरू करेगा सीसीआरएस

चेन्नई, 29 जून यहां सरकारी कोविड-19 देखभाल केंद्र में एलोपैथिक इलाज में चिकित्सीय पद्धति सिद्ध की ‘अतिरिक्त’ थेरेपी से प्रोत्साहित करने वाले परिणाम सामने आने के बाद केंद्रीय सिद्ध अनुसंधान परिषद (सीसीआरएस) शहर के व्यसारपादी में जल्द ही कोरोना वायरस के 60 मरीजों पर एक अध्ययन शुरू करेगा।

नये क्लिनिकल ट्रायल का मकसद सिद्ध दवा समूहों और “काबासूरा कुडिनीर” के कोविड-19 से बचाव या उसके इलाज में रोग निरोधक प्रभाव को सामने लाना है।

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सरकारी स्टेनली मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कोविड-19 देखभाल केंद्र में अतिरिक्त थेरेपी देने का पूर्व में प्रयास किया गया था।

काबासूरा कुडिनीर जड़ी-बूटी से बना एक मिश्रण है जिसमें अदरक, पिपली, लौंग, सिरकूनकोरी की जड़ और कई अन्य जड़-बूटियां शामिल हैं।

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सीसीआरएस की महानिदेशक डॉ के कनकावली ने कहा, ‘‘ हम अगले हफ्ते परीक्षण शूरू करने के लिए ‘क्लिनिकल ट्रायल्स रजिस्ट्री-इंडिया’ (सीटीआरआई) से संख्या पर मंजूरी मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।”

सीसीआरएस, सिद्ध दवा पद्धति में अनुसंधान से जुड़ा शीर्ष निकाय है।

नया अध्ययन केंद्रीय आयुष मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप और तमिलनाडु सरकार से मिली सहमति के साथ किया जा रहा है।

उन्होंने सोमवार को पीटीआई- को बताया, “कोरोना वायरस के बिना लक्षण वाले और हल्के से मामूली संक्रमण से ग्रसित करीब 60 मरीजों को व्यासरपादी में ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन द्वारा स्थापित कोविड-19 देखभाल केंद्र में अध्ययन में शामिल किया जाएगा।”

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