नयी दिल्ली, 17 जुलाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जल्द ही एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एआईआईपीएल) के खिलाफ एक पूरक अंतिम रिपोर्ट दाखिल करेगी। केंद्रीय एजेंसी विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के कथित उल्लंघन में संस्था के निदेशकों की भूमिका की जांच कर रही है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी
उन्होंने बताया कि एजेंसी ने सोमवार को एक विशेष अदालत को भरोसा देते हुए कहा कि ‘‘अंतिम रिपोर्ट आखिरी चरण में है’’ और सुनवाई की अगली तारीख छह अक्टूबर को या उससे पहले ‘‘बिना चूके ’’ रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।
सीबीआई ने जनवरी 2022 में एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एआईआईपीएल) और उसके तत्कालीन प्रमुख आकार पटेल के खिलाफ विशेष अदालत के समक्ष आरोप पत्र दाखिल किया था।
अधिकारियों ने बताया कि अदालत ने अभी तक आरोप पत्र पर संज्ञान नहीं लिया है और एजेंसी से निदेशकों की भूमिका की जांच करने को कहा है एवं इसी संबंध में एक पूरक अंतिम रिपोर्ट दाखिल की जानी थी। उन्होंने बताया कि एजेंसी ने पहले भी कम से कम तीन मौकों पर अदालत से इसी तरह से रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया था।
विशेष अदालत ने सीबीआई से निदेशकों की कथित भूमिका की आगे की जांच करने का निर्देश देते हुए रेखांकित किया था कि जांच अधिकारी ने स्वीकार किया था कि आकार पटेल उक्त समय पर कथित अनुबंधों के न तो निदेशक थे और न ही हस्ताक्षरकर्ता थे।
गौरतलब है कि नवंबर 2019 में एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एआईआईपीएल), इंडियंस फॉर एमनेस्टी इंटरनेशनल ट्रस्ट (आईएआईटी), एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया फाउंडेशन ट्रस्ट (एआईआईएफटी), एमनेस्टी इंटरनेशनल साउथ एशिया फाउंडेशन (एआईएसएएफ) और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि आरोप है कि एआईआईपीएल के माध्यम से एमनेस्टी इंटरनेशनल, यूके से विदेशी चंदा प्राप्त करके उपरोक्त संस्थाओं द्वारा एफसीआरए और भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया, जबकि एफसीआरए के तहत एआईआईएफटी और अन्य ट्रस्टों को विदेश से चंदा लेने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था।
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