देश की खबरें | सीबीआई ने रिश्वतखोरी के मामले में अपने सेवानिवृत्त अधिकारी को किया गिरफ्तार

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एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर सीबीआई ने एक कंपनी के खिलाफ मामले को निपटाने के लिए उससे कथित रूप से 25 लाख रुपये की रिश्वत लेने के मामले में अपने हाल ही में सेवानिवृत्त हुए एक अधिकारी को गिरफ्तार किया है।

अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

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उक्त अधिकारी बिहार के चारा घोटाले की जांच में शामिल थे और उन्होंने अन्य बड़े मामलों में भी तफ्तीश की है।

अधिकारियों ने बताया कि पूर्व सीबीआई अधिकारी एनएमपी सिन्हा को एक व्यक्ति के साथ गिरफ्तार किया गया जिसने कथित रूप से रिश्वत पहुंचाई थी। एजेंसी ने रिश्वत का धन भी बरामद कर लिया।

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आरोप है कि सीबीआई के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में पदस्थ रहे सिन्हा खनन कंपनी उषा मार्टिन को झारखंड में 2005 में लौह अयस्क खान का पट्टा दिये जाने से संबंधित मामले में उसके खिलाफ कथित धोखाधड़ी के मामले को देख रहे थे।

सीबीआई ने शनिवार को अनेक शहरों में आठ स्थानों पर तलाशी ली। इनमें अधिकारी का फरीदाबाद स्थित आवास शामिल है। इसके अलावा रांची में उषा मार्टिन के कार्यालय और दिल्ली तथा गाजियाबाद के अन्य ठिकाने शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि सिन्हा अगस्त में ही सेवानिवृत्त हुए हैं।

आरोप है कि वह कंपनी के प्रतिनिधि के साथ संपर्क में थे और उन्होंने कंपनी के खिलाफ मामले को निपटाने के लिए उससे 25 लाख रुपये की घूस मांगी थी।

एक सूत्र से मिली जानकारी के आधार पर सीबीआई के एक दल ने मामले में शामिल एक व्यक्ति को पकड़ा और रिश्वत की राशि भी जब्त की जो सेवानिवृत्त अधिकारी को दी गयी थी।

सीबीआई के सूत्रों के अनुसार एजेंसी ने उषा मार्टिन के कर्ताधर्ताओं, कंपनी और झारखंड सरकार के तत्कालीन खनन निदेशक आईडी पासवान के खिलाफ कथित आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है।

आरोप है कि 2005 में सिंहभूम पश्चिम जिले के घाटकुरी गांव में लौह अयस्क की खान का पट्टा देने में पांच अन्य आवेदकों के सामने कंपनी की तरफदारी की गयी।

राज्य सरकार ने केंद्र से उषा मार्टिन की सिफारिश की थी क्योंकि कंपनी ने कथित तौर पर वादा किया था कि वह राज्य के घमरिया में अपने इस्पात संयंत्र में लौह अयस्क का इस्तेमाल करेगी।

सीबीआई का आरोप है कि बाद में कंपनी इस तथ्य की आड़ में अपने वादे से पलट गयी कि इस संबंध में कैबिनेट नोट में विशेष कारण का विशिष्ट रूप से उल्लेख नहीं है।

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