देश की खबरें | सीबीआई एवं ईडी आबकारी घोटाले की जांच से जुड़े प्रेस बयान पेश करें : उच्च न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) तथा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को निर्देश दिया कि वे दिल्ली के कथित आबकारी घोटाला मामले की जांच के संबंध में उनके द्वारा प्रेस को जारी बयानों एवं विज्ञप्तियों को पेश करें। इस मामले में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया एवं व्यापारी विजय नायर भी आरोपी हैं।

नयी दिल्ली, 14 नवंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) तथा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को निर्देश दिया कि वे दिल्ली के कथित आबकारी घोटाला मामले की जांच के संबंध में उनके द्वारा प्रेस को जारी बयानों एवं विज्ञप्तियों को पेश करें। इस मामले में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया एवं व्यापारी विजय नायर भी आरोपी हैं।

उच्च न्यायालय ने नायर की अर्जी पर यह आदेश जारी किया है। नायर ने दावा किया है कि जांच एजेंसी इस मामले के संबंध में संवदेनशील सूचनाएं मीडिया को लीक कर रही हैं जिससे बतौर आरोपी उनके अधिकारों का हनन हो रहा है।

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने कहा, ‘‘इस मामले में आगे बढ़ने से पहले अदालत प्रतिवादी नंबर एक (सीबीआई) और प्रतिवादी नंबर दो (ईडी) से उनके द्वारा इस आपराधिक मामले की जांच के सिलसिले में प्रेस को जारी किये गये सभी बयानों एवं विज्ञप्तियों को पेश करने का अनुरोध करती है।’’

उच्च न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 नवंबर की तारीख तय की। अदालत ने कहा कि वह जांच एजेंसी द्वारा जारी किये गये आधिकारिक बयानों व विज्ञप्तियों पर गौर करेगी तथा परखेगी कि टेलीविजन चैनलों ने इस मुद्दे पर जो खबरें चलायीं वे उन बयानों व विज्ञप्तियों पर आधारित थीं या उनकी ‘कल्पना की उड़ान’ थीं।

नायर कार्यक्रमों का आयोजन करने वाली एक कंपनी के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा आम आदमी पार्टी (आप) के संचार प्रभारी हैं। उनकी ओर से पेश वरिष्ठ वकील दयान कृष्णन ने दलील दी कि यदि कोई समाचार समूह कल्पना के आधार पर चीजें फैला रहा है तो यह खतरनाक है।

इस पर न्यायमूर्ति वर्मा ने कहा, ‘‘तब, यह हमारे लिए खतरे की घंटी है।’’

कृष्णन ने कहा कि यह मामला सुनवाई के अहम पड़ाव पर है तथा जब उससे जुड़ी चीजें मीडिया में आती हैं तो उनके (उनके मुवक्किल के) अधिकारों का पूरी तरह हनन होता है।

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा, ‘‘ यह खुलासा तत्काल, प्राइम टाइम या दिन में कभी भी किया जा रहा है।’’

अभियोजन पक्ष के अनुसार दिल्ली के सत्तारूढ़ दल आप से संबद्ध नायर ने अन्य लोगों के साथ मिलकर साजिश रची तथा उस साजिश के तहत दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति बनायी गयी एवं उसे लागू किया गया।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक इस साजिश का मकसद सरकारी खजाने की कीमत पर शराब उत्पादकों एवं वितरकों को अनुचित एवं अवैध फायदा पहुंचाना था और इस नीति के फलस्वरूप सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ।

सीबीआई ने भादंसं और भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत उपमुख्यमंत्री मनीष सिसादिया समेत जनसेवकों एवं आबकारी विभाग के अधिकारियों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी।

प्राथमिकी के अनुसार सक्षम व अधिकृत अधिकारी से मंजूरी लिये बगैर ही आबकारी नीति के बारे में सिफारिश करने एवं निर्णय लेने में इन अधिकारियों की अहम भूमिका थी।

प्राथमिकी के मुताबिक आरोपियों का इरादा अवैध मौद्रिक फायदे के लिए शराब लाइसेंसधारकों को अनुचित फायदा पहुंचाना था।

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