देश की खबरें | कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया ने पोप फ्रांसिस के निधन पर शोक जताया

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नयी दिल्ली/कोच्चि/पणजी/रांची, 21 अप्रैल कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) ने पोप फ्रांसिस के निधन पर सोमवार को शोक व्यक्त किया और घोषणा की कि वह नौ दिन तक शोक मनाएगे तथा प्रार्थना संभाएं करेगा।

फ्रांसिस, लगभग 1,300 वर्षों में पहले गैर-यूरोपीय पोप थे। उनका सोमवार को निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे।

भारत में चर्च के सबसे बड़े निकाय सीबीसीआई ने कहा, ‘‘पोप फ्रांसिस के निधन पर सीबीसीआई गहरा दुख और गहरी संवेदना व्यक्त करता है। भारत में चर्च, ईसाई धर्म में आस्था रखने वाले दुनियाभर के लाखों लोगों के साथ मिलकर पोप फ्रांसिस के निधन पर शोक व्यक्त करता है जिन्होंने असाधारण साहस, करुणा और विनम्रता के साथ ग्लोबल कैथोलिक चर्च का नेतृत्व किया।’’

उन्होंने कहा कि पोप फ्रांसिस ने असहाय, शरणार्थियों और समाज में हाशिए पर खड़े लोगों के लिए अटूट प्रतिबद्धता के साथ काम किया।

सीबीसीआई ने सभी कैथोलिक से अपील की कि वे कल या किसी सुविधाजनक दिन पोप फ्रांसिस की आत्मा की शांति के लिए होली मास अर्पित करें। उन्होंने कहा कि भारत में चर्च नौ दिन तक शोक मनाया जाएगा और प्रार्थना संभाएं होंगी।

सीबीसीई के अध्यक्ष आर्कबिशप एंड्रयूज थजथ ने उन्हें ‘‘दयालु और न्याय की वकालत करने वाला’’ बताया।

दिल्ली के कई चर्चों ने सोमवार को काले झंडे फहराकर और शोक सभा आयोजित करके पोप फ्रांसिस के निधन पर शोक व्यक्त किया, जबकि पादरियों ने उन्हें एक विनम्र सुधारक के रूप में याद किया, जिन्होंने करुणा के साथ सेवा की।

दिल्ली में मलंकारा ऑर्थोडॉक्स सीरियन चर्च के ‘इक्यूमेनिकल रिलेशंस’ विभाग के अध्यक्ष मार डेमेट्रियोस ने कहा, ‘‘केवल कैथोलिक चर्च के ही नहीं बल्कि सभी ईसाइयों के लिए एक प्रिय और प्रेरक आध्यात्मिक नेता पोप फ्रांसिस का निधन वास्तव में एक दुखद घटना है।’’

पोप फ्रांसिस के मलंकारा चर्च के प्रमुख बेसिलियोस मार्थोमा मैथ्यूज-तृतीय के साथ घनिष्ठ संबंध थे और उन्होंने कहा कि पोप फ्रांसिस का जाना चर्च के लिए व्यक्तिगत क्षति जैसा है।

दिल्ली के आर्चडायोसिस के आर्कबिशप अनिल जोसेफ थॉमस कोउटो ने पोप फ्रांसिस को स्नेह करने वाले व्यक्ति के रूप में याद किया जिन्होंने लोगों को उनकी खुशियों और संघर्षों दोनों में सहारा दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं 2013 में आर्कबिशप बना तो मैं पोप फ्रांसिस से मिला था। उन्होंने मुझसे कहा, ‘आगे बढ़ो, डरो मत, प्रभु तुम्हारे साथ हैं’। वह हमेशा कहा करते थे-मैं तुम्हारे लिए प्रार्थना करता हूं, इसलिए तुम भी मेरे लिए प्रार्थना करो। यही सादगी मुझे उनमें देखने को मिली।’’

उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें वेटिकन क्रिप्ट में नहीं बल्कि रोम के सांता मारिया मैगीगोर बेसिलिका में दफनाया जाएगा, जहां वह अक्सर जाते थे।’’

फरीदाबाद के सिरो-मालाबार कैथोलिक बिशप, आर्कबिशप कुरियाकोस भरनीकुलंगरा ने रोम की अपनी यात्रा के दौरान पोप फ्रांसिस से मुलाकात को याद किया।

उन्होंने कहा, ‘‘वह हमेशा चर्च को समाज के सभी वर्गों, खासकर हाशिए पर पड़े लोगों के करीब लाना चाहते थे। इसीलिए उन्होंने 'सिनोडैलिटी' का विचार पेश किया और चर्च को एक उल्टे पिरामिड के रूप में फिर से कल्पना की, जिसमें खुद को सबसे नीचे रखकर दूसरों की सेवा की।’’

केरलभर के चर्च के प्रमुखों और ईसाई समुदाय ने पोप फ्रांसिस के निधन पर शोक व्यक्त किया और उन्हें उनकी सादगी और भारतीय संस्कृति के प्रति उनके गहरे सम्मान के लिए याद किया।

सीरो-मालाबार चर्च के प्रमुख आर्कबिशप राफेल थैटिल ने कहा कि पोप फ्रांसिस अपने पद की गरिमा से कहीं बढ़कर लोगों से बेहद स्नेह और सौम्यता के साथ जुड़े। उन्होंने कहा कि पोप भारत आने के लिए उत्सुक थे, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण वह यात्रा नहीं कर पाए।

केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल (केसीबीसी) के अध्यक्ष ‘कार्डिनल’ बेसिलियोस क्लेमिस ने कहा कि पोप फ्रांसिस भारतीय संस्कृति का गहरा सम्मान करते थे।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने व्यक्तिगत रूप से हमारे देश के प्रति उनके सम्मान को देखा है। उन्होंने भारत को एक महान सभ्यता के रूप में देखा।’’ उन्होंने कहा कि पोप का नेतृत्व वास्तव में असाधारण था।

पोप फ्रांसिस के निधन को ‘‘सभी चर्च के लिए दुखद का समाचार बताते हुए गोवा चर्च ने शोक व्यक्त किया लेकिन यह भी कहा कि यह ‘‘इस महान व्यक्ति’’ का नेतृत्व प्रदान करने के लिए ‘‘प्रभु को धन्यवाद देने का क्षण’’ है।

गोवा और दमन के आर्कबिशप फिलिप नेरी कार्डिनल फेराओ ने कहा, ‘‘चर्च को एक धर्मसभा समुदाय में बदलने के उनके दृष्टिकोण ने सभी स्तरों पर एक अमिट छाप छोड़ी है। ऐसा समुदाय जो सभी को सुनता है, समझता है, साथ लेकर चलता है और समावेशिता को अपनाता है।’’

ओल्ड गोवा में सेंट जोसेफ वाज रिन्यूअल सेंटर के निदेशक फादर हेनरी फाल्काओ ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘यह सभी चर्च के लिए एक दुखद समाचार है। लेकिन साथ ही, यह ईश्वर को धन्यवाद देने का क्षण है। प्रभु ने पिछले लगभग 12 वर्षों से इस महान शख्सियत के माध्यम से चर्च का नेतृत्व किया। इसलिए यह चर्च के लिए प्रभु को धन्यवाद देने का भी क्षण है।’’

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