देश की खबरें | लोकपाल में प्रतिनियुक्ति चाह रहे अधिकारी की याचिका पर कैट नें केंद्र, उत्तराखंड से जवाब मांगा

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एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, आठ अगस्त केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने ‘व्हिसलब्लोअर’ नौकरशाह संजीव चतुर्वेदी की उस याचिका पर केंद्र और उत्तराखंड सरकार से जवाब मांगा है, जिसमें इस आईएफएस अधिकारी ने भ्रष्टाचार रोधी संस्था लोकपाल में प्रतिनियुक्ति का आग्रह किया है। एक आधिकारिक आदेश में यह जानकारी दी गई है।

चतुर्वेदी 2002 बैच के उत्तराखंड कैडर के भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के अधिकारी हैं।

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उन्होंने सरकारी कर्मचारियों के सेवा से जुड़े मामलों पर निर्णय करने वाले अधिकरण (कैट) का रुख कर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव को यह यह निर्देश देने का आग्रह किया है कि उन्हें लोकपाल में शामिल होने की अनुमति देने वाले दिसंबर 2019 के उत्तराखंड सरकार द्वारा दिये गये अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) पर एक उपयुक्त आदेश जारी किया जाए।

वह अभी उत्तराखंड के हल्दवानी में मुख्य वन संरक्षक (अनुसंधान) के तौर पर नियुक्त हैं।

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अधिकरण की इलाहाबाद पीठ ने मंगलवार को एक आदेश जारी किया, जिसके मुताबिक, ‘‘दोनों प्रतिवादियों (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार के मुख्य सचिव) की ओर से जवाब दाखिल किया जाए। याचिकाकर्ता को दो हफ्ते के अंदर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया जाता है।’’

इस साल फरवरी में अधिकरण में दायर की गई अपनी याचिका में चतुर्वेदी ने लोकपाल में शामिल होने के लिये राज्य सरकार द्वारा उन्हें दी गई एनओसी के संबंध में, मामले के निस्तारण तक, यथास्थिति कायम रखने के लिये प्रतिवादियों को निर्देश देने के रूप में खुद को राहत देने का भी आग्रह किया।

न्यायमूर्ति भरत भूषण (न्यायिक सदस्य) और देवेंद्र चौधरी (प्रशासनिक सदस्य) की खंडपीठ ने कहा, ‘‘दोनों वकीलों को अंतरिम राहत के अनुरोध पर अपनी आपत्ति तीन हफ्तों के अंदर अलग-अलग दाखिल करने का भी निर्देश दिया गया है।’’

बहरहाल, आदेश में कहा गया कि इस विषय को अंतरिम राहत के अनुरोध के निस्तारण के वास्ते 27 अगस्त के लिये सूचीबद्ध कर दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी अनवरत लड़ाई का जिक्र करते हुए चतुर्वेदी ने नवंबर में लोकपाल में प्रतिनियुक्त किये जाने की मांग की थी।

उन्होंने उत्तराखंड सरकार के माध्यम से लोकपाल को लिखे पत्र में कहा था, ‘‘मैं स्वतंत्रता सेनानियों के एक सम्मानित परिवार से आता हूं और मेरा पूरा करियर भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष/प्रतिरोध का रहा है...।’’

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को लेकर उन्हें 2015 के रमन मैग्सायसाय पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

चतुर्वेदी ने पत्र में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली में सीवीओ के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान जांच किये गये कुछ प्रमुख मामलों का भी जिक्र किया था।

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