देश की खबरें | अदालत से गर्भपात की अनुमति मांगने वाले मामले बढ़े : रिपोर्ट

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्च न्यायालयों में गर्भपात की अनुमति मांगने से संबंधित मामलों में वृद्धि हुई है। मंगलवार को जारी एक नई रिपोर्ट में यह कहा गया।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 22 सितंबर उच्च न्यायालयों में गर्भपात की अनुमति मांगने से संबंधित मामलों में वृद्धि हुई है। मंगलवार को जारी एक नई रिपोर्ट में यह कहा गया।

‘सुरक्षित गर्भपात तक पहुंच में न्यायपालिकाकी भूमिका का आकलन-2’’ रिपोर्ट में ऐसे मामलों का विश्लेषण किया गया है जिनमें उच्च न्यायालय से गर्भपात की अनुमति मांगी गई थी। ये मामले मई 2019 से अगस्त 2020 के बीच के हैं।

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रिपोर्ट महिला अधिकारों की सुरक्षा के लिए तथा भारत में सुरक्षित गर्भपात तक पहुंच बनाने की दिशा में काम कर रहे तकरीबन 100 व्यक्तियों एव संगठनों के नेटवर्क ‘प्रतिज्ञा कैंपेन’ ने जारी की है।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘14 उच्च न्यायालयों में इस बाबत 243 मामले दायर किए गए जबकि उच्चतम न्यायालय में ऐसी एक अपील की गई। 84 फीसदी मामलों में गर्भपात की इजाजत दी गई।’’

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इसमें बताया गया, ‘‘74 फीसदी मामले गर्भाधान के 20 हफ्ते बाद अदालत में आए। इनमें से 29 फीसदी मामले बलात्कार/यौन उत्पीड़न के थे, 42 फीसदी मामले भ्रूण में विकार के थे।’’

अदालत में आए 23 फीसदी मामले ऐसे थे जिनमें गर्भधारण किए बीस हफ्ते या इससे कम वक्त हुआ था।

रिपोर्ट की लेखिका एवं प्रप्रतिज्ञा कैंपेन की सदस्य अनुभा रस्तोगी ने कहा कि बढ़ते मामले यह दिखाते हैं कि देश में सुरक्षित और वैध गर्भपात सेवा सुलभ कराने के लिए अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है।

प्रतिज्ञा कैंपेन के एक अन्य सदस्य वीएस चंद्रशेखर ने कहा कि यह तथ्य क्षुब्ध करने वाला है कि बीस हफ्ते से कम गर्भावस्था वाली स्त्रियों को भी अदालत जाना पड़ रहा है।

गौरतलब है कि चिकित्सीय गर्भपात संशोधन विधेयक 2020 पर अभी राज्यसभा की मंजूरी का इंतजार है।

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