देश की खबरें | स्ट्रेट द्वीप पर कोविड-19 का मामला : एसटी आयोग ने अंडमान-निकोबार प्रशासन से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 31 अगस्त राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) ने सोमवार को कम होती ग्रेट अंडमानी जनजाति के लोगों में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने पर चिंता जताई और अंडमान-निकोबार प्रशासन से दो हफ्ते में तथ्यात्मक रिपोर्ट देने को कहा।

अंडमान-निकोबार प्रशासन के मुताबिक स्ट्रेट द्वीप पर रहने वाली जनजाति के 10 सदस्य कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं। उल्लेखनीय है कि इस जनजाति के केवल 59 सदस्य जीवित हैं।

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अखबार में छपी एक खबर पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने कहा, ‘‘ग्रेट अंडमानी जनजाति के 10 सदस्यों का कोरोना वायरस से संक्रमित होना समूह और दूरदराज के द्वीपों पर रह रहे अन्य मूल लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।’’

अंडमान-निकोबार के मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में आयोग ने कहा, ‘‘ मामले की गंभीरता को देखते हुए दो हफ्ते में तथ्यात्मक रिपोर्ट और प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम की जानकारी आयोग को भेजने का अनुरोध किया जाता है।’’

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उल्लेखनीय है कि काम के सिलसिले में जनजाति के छह सदस्य पोर्ट ब्लेयर आए थे और जांच में उनके संक्रमित होने की जानकारी मिली। स्वास्थ्य टीम हाल में स्ट्रेट द्वीप जनजाति के बाकी सदस्यों की जांच के लिए गई थी।

अंडमान-निकोबार के स्वास्थ्य विभाग में उप निदेशक अैर नोडल अधिकारी ने बताया कि द्वीप पर जनजाति के 37 सदस्यों की जांच की गई जिनमें से चार और लोगों को कोविड-19 होने की पुष्टि हुई।

गौरतलब है कि अंडमान-निकोबार में छह अधिसूचित जनजातियां - निकोबारी, ग्रेड अंडमानी, जारवा, सेंथिल, ओंग और शोमपेन- हैं। निकोबारी को छोड़ सभी अन्य जनजातियां खतरे का सामना कर रही हैं।

जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने शनिवार को कहा था कि उनका मंत्रालय नियमित रूप से अंडमान-निकोबार प्रशासन के संपर्क में है।

अंडमान-प्रशासन ने मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट में बताया कि जनजाति के संक्रमित 10 सदस्यों में तीन ठीक हो चुके हैं जबकि शेष का जीबी पंत अस्पताल में या गृह पृथकवास में इलाज चल रहा है।

प्रशासन ने बताया, ‘‘ संक्रमितों के परिवारों को छोड़कर अधिकतर आदिवासियों को स्ट्रेट द्वीप वापस भेज दिया गया है। संक्रमित सदस्यों की सहत ठीक है और वे निगरानी में हैं।’’

प्रशासन ने यह भी बताया कि डुगोंग क्रीक में रहने वाले ओंग जनजाति के सदस्यों के नमूनों की जांच की गई जिनमें से सभी की रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई।

प्रशासन के मुताबिक जारवा जनजाति के लोगों की भी जांच करने का फैसला किया गया है।

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