देश की खबरें | अकादमिक जगत में चर्चा को रोक नहीं सकते : उच्च न्यायालय ने इतिहासकार संपत की याचिका पर कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को इतिहासकार विक्रम संपत को तत्काल अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि वह अकादमिक जगत में चर्चा को नहीं रोक सकते हैं।
नयी दिल्ली, चार मार्च दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को इतिहासकार विक्रम संपत को तत्काल अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि वह अकादमिक जगत में चर्चा को नहीं रोक सकते हैं।
दरअसल, संपत ने सोशल मीडिया से कुछ कथित मानहानिकारक सामग्री हटाने का अनुरोध किया था, जो शिक्षाविद ऑड्री ट्रश्क द्वारा लगाये गये साहित्यिक चोरी के आरेापों से संबद्ध है।
लंदन के रॉयल हिस्टोरिकल सोसाइटी को एक पत्र लिख कर संपत पर वी. डी. सावरकर के दो खंडों की जीवनी की साहित्यिक चोरी करने का आरोप लगाने को लेकर इतिहासकार ने ट्रश्क और अन्य के खिलाफ एक मुकदमा दायर किया था।
न्यायमूर्ति अमित बंसल ने संपत से कहा, ‘‘वह हजार लोगों के खिलाफ मनाही का आदेश नहीं ले सकते हैं, जो इस बारे में बात कर रहे हैं।’’
न्यायाधीश ने कहा कि मानहानि का मुकदमा कुछ खास प्रतिवादियों के खिलाफ है और वह अर्जी दायर करना जारी नहीं रख सकते तथा उन्हें अपने पक्ष में लागू पहले के दो आदेशों को लागू कराना चाहिए।
अदालत ने पत्र के संदर्भ में तत्काल राहत के लिए दायर अर्जी की सुनवाई करते हुए कहा, ‘‘आप विषय पर अकादिमक जगत में चर्चा को नहीं रोक सकते हैं। अदालत ने एक आदेश जारी किया है, लेकिन यदि विश्व के शिक्षाविदों का मानना है कि आपने साहित्यिक चोरी की है तो आप इस बारे में बात करने से हजार लोगों के खिलाफ मनाही आदेश नहीं ले सकते हैं।’’
अदालत ने कहा, ‘‘उन्हें बखूबी अपने अधिकारों के तहत पत्र लिखा है। इस पत्र में मानहानिकारक क्या है? यदि कुछ शिक्षाविदों का मानना है कि आपने साहित्यिक चोरी की है...तो देखिये, आखिरकार आप दुनिया को नहीं रोक सकते।’’
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ आप भी अपने समर्थन में एक पत्र प्रसारित करा सकते हैं। आप सोशल मीडिया पर आने वाले विचारों पर रोक नहीं लगा सकते। मैं कोई आदेश नहीं जारी करने जा रहा।’’
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