देश की खबरें | पीएसआई घोटाले में निचले स्तर के अधिकारी निडरता से जांच कर सकते हैं? अदालत ने पूछा
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बेंगलुरु, 14 जुलाई कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को राज्य सरकार से पूछा कि क्या निचले स्तर के अधिकारी पुलिस उप-निरीक्षक (पीएसआई) भर्ती घोटाले के मामले में साहसिक तरीके से जांच कर सकते हैं जबकि एडीजीपी आरोपी हैं।
न्यायमूर्ति एच पी संदेश ने मामले में कुछ आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह प्रश्न किया। एडीजीपी (भर्ती) अमृत पॉल को घोटाले के सिलसिले में 4 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था।
अदालत ने सरकारी वकील से जानना चाहा कि क्या एडीजीपी स्तर के अधिकारी से जुड़े मामले की जांच निचले स्तर के अधिकारी निडरता से और निष्पक्ष तरीके से कर पाएंगे?
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम निष्पक्ष जांच की अपेक्षा कैसे कर सकते हैं?
सरकारी वकील ने जवाब में कहा कि सीआईडी के डीजीपी व्यक्तिगत रूप से जांच पर नजर रख रहे हैं।
अदालत ने कहा कि एडीजीपी को गिरफ्तारी के 10 दिन बाद भी अभी तक उनका बयान दर्ज करने के लिए अदालत के समक्ष पेश क्यों नहीं किया गया है।
तब सरकारी वकील ने कहा कि हजारों कॉल रिकार्ड की पड़ताल की जा रही है और इसमें समय लग रहा है।
याचिकाकर्ताओं के वकीलों की दलीलें आज पूरी हुईं और अभियोजन पक्ष की दलीलें आंशिक रूप से सुनी गयीं। जमानत याचिका को 20 जुलाई तक स्थगित कर दिया गया।
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