देश की खबरें | मुर्शिदाबाद हिंसा प्रभावित लोगों के शिविरों को निरूद्ध केंद्रों में तब्दील कर दिया गया है: सुभेंदु

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कोलकाता, 19 अप्रैल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने हिंसा पीड़ितों के राहत शिविरों को ‘‘निरूद्ध’’ केंद्रों में तब्दील कर दिया है और प्रशासन बाहर से आने वाले किसी भी व्यक्ति को उनसे मिलने या उनकी दशा देखने की ‘‘अनुमति नहीं दे रहा’’ है।

राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर हिंसा प्रभावित लोगों के प्रति ‘‘अमानवीय’’ व्यवहार करने का भी आरोप लगाया।

वरिष्ठ भाजपा नेता ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि लोगों, विशेष रूप से महिलाएं और बच्चे अपनी गरिमा की रक्षा के लिए धुलियान और शमशेरगंज में अपना घर-बार छोड़ने के लिए मजबूर हुए तथा भागीरथी नदी के पार वैष्णवनगर क्षेत्र में परलालपुर उच्च विद्यालय भवन और अन्य नजदीकी स्कूलों में शरण ली।

अधिकारी ने आरोप लगाया, ‘‘हालांकि, सरकार अपना अमानवीय चेहरा दिखा रही है और मीडिया तथा स्वयंसेवी संगठनों को विस्थापित लोगों से बातचीत करने की अनुमति नहीं दे रही है। उन्हें भोजन में घटिया किस्म का चावल परोसा जा रहा है। पुलिस विस्थापितों के लिए गैर सरकारी संगठनों द्वारा दान किये गए भोजन को स्थानीय गोदामों में जमा कर रही है।’’

उन्होंने यह भी दावा किया कि विस्थापितों की मदद के लिए आगे आए गैर सरकारी संगठनों के खिलाफ झूठे मामले बनाकर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है।

नंदीग्राम से भाजपा विधायक ने कहा, ‘‘अपने घर-बार छोड़कर पलायन करने वाले लोगों के साथ ऐसा व्यवहार क्रूर, अमानवीय और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है।’’

अधिकारी ने धमकी दी कि यदि ‘‘मानवाधिकारों का ऐसा हनन जारी रहा तो’’ वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।

बहरामपुर से कांग्रेस के पूर्व सांसद अधीर चौधरी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार पीड़ित परिवारों की घर वापसी के लिए कोई व्यवस्था नहीं कर रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मीडिया और विस्थापित लोगों के रिश्तेदारों एवं मित्रों को राहत शिविरों में उनसे मिलने की पुलिस ‘‘अनुमति नहीं दे रही’’ है।

तृणमूल कांग्रेस महासचिव कुणाल घोष ने कहा कि भाजपा जैसी विपक्षी पार्टियां राज्य को अस्थिर करने के लिए काम कर रही हैं और वे नहीं चाहते कि सामान्य स्थिति बहाल हो।

वक्फ अधिनियम में संशोधन के खिलाफ 11 और 12 अप्रैल को प्रदर्शन के दौरान भीड़ के हमले के बाद, लगभग 400 लोग, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे, धुलियान, शमशेरगंज स्थित अपना घर-बार छोड़कर मालदा के वैष्णवनगर चले गए थे।

मुस्लिम बहुल इलाकों में हुई सांप्रदायिक झड़पों में तीन लोग मारे गए और सैकड़ों अन्य बेघर हुए हैं।

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