विदेश की खबरें | कंबोडिया : हुन सेन के सत्तारूढ़ दल ने आम चुनाव में जीत का दावा किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. इस चुनाव में विपक्ष के भयादोहन और दमन के कारण प्रधानमंत्री हुन सेन की पार्टी ‘कंबोडियन पीपुल्स पार्टी’ के एक बार फिर जीत दर्ज करने की संभावना पहले से जताई जा रही थी। आलोचकों का कहना है कि इस चुनाव ने देश में लोकतंत्र को मजाक बना दिया है।
इस चुनाव में विपक्ष के भयादोहन और दमन के कारण प्रधानमंत्री हुन सेन की पार्टी ‘कंबोडियन पीपुल्स पार्टी’ के एक बार फिर जीत दर्ज करने की संभावना पहले से जताई जा रही थी। आलोचकों का कहना है कि इस चुनाव ने देश में लोकतंत्र को मजाक बना दिया है।
हुन सेन ने रविवार देर रात अपने ‘टेलीग्राम’ चैनल पर पोस्ट किया कि हर प्रांत में प्राधिकारियों द्वारा संकलित अनधिकृत परिणाम में ‘कंबोडियन पीपुल्स पार्टी’ (सीपीपी) को 120 सीट मिली हैं, जबकि ‘नेशनल यूनाइटेड फ्रंट फॉर एन इंडिपेंडेंट, न्यूट्रल, पीसफुल एंड को-ऑपरेटिव कंबोडिया’ (एफयूएनसीआईएनपीईसी) को पांच सीट हासिल हुई हैं।
राष्ट्रीय चुनाव समिति ने बताया कि चुनाव में 84.6 प्रतिशत पात्र मतदाताओं ने मतदान किया।
सीपीपी के प्रवक्ता सोक एयसन ने कहा कि उनका मानना है कि उनकी पार्टी ने कुल मतदान के 78-80 प्रतिशत मत हासिल किए हैं।
चुनाव में यूरोपीय संघ, अमेरिका और अन्य पश्चिम देशों ने यह कहकर अपने पर्यवेक्षकों को भेजने से इनकार कर दिया था कि निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनाव कराने के लिए आवश्यक शर्तों को पूरा नहीं किया गया है। रूस, चीन और गिनी-बिसाऊ ने अपने पर्यवेक्षकों को कंबोडिया भेजा है।
हुन सेन ने चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के कुछ ही देर बाद देश की राजधानी नोम पेन्ह के बाहरी इलाके में स्थित अपने गृह जिले में मतदान केंद्र पर मतदान किया था। इस दौरान उन्होंने मतदान केंद्र के बाहर अपने समर्थकों से हाथ मिलाया और ‘सेल्फी’ भी खिंचवाई।
एशिया के किसी देश पर सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेता हुन सेन (70) की मजबूत रणनीति के कारण पिछले 38 साल में उनकी ताकत लगातार बढ़ी है, लेकिन उन्होंने इस बार चुनाव जीतने के बाद प्रधानमंत्री पद अपने सबसे बड़े बेटे हुन मानेट को सौंपने की घोषणा की है।
हुन मानेट (40) ने वेस्ट प्वाइंट स्थित ‘यूएस मिलिट्री अकेडमी’ से स्नातक, न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय ने स्नातकोत्तर और ब्रिटेन की ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। वह इस समय कंबोडिया के सेना प्रमुख हैं।
मानेट के पश्चिमी देशों में शिक्षा हासिल करने के बावजूद विश्लेषकों को ऐसा नहीं लगता कि उनके सत्ता संभालने पर कंबोडिया सरकार की नीति में तत्काल कोई बदलाव आएगा। उनके पिता की नीतियों के कारण कंबोडिया की हाल के वर्षों में चीन के साथ नजदीकियां बढ़ी हैं।
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