देश की खबरें | कैग ने अरुणाचल प्रदेश में पीएम-किसान योजना को लागू करने में ‘खामियों’ का उल्लेख किया
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ईटानगर, सात सितंबर भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने अरुणाचल प्रदेश में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना को लागू करने में कई तरह की ‘खामियों’ की ओर इशारा किया है।
कैग ने हाल ही में विधानसभा में पेश की गई अपनी रिपोर्ट में राज्य में केंद्रीय योजना को लागू करने में ‘कई विसंगतियों’ का उल्लेख किया।
यह योजना फरवरी 2019 में शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करना और जोखिम को कम करना है। योजना के तहत पात्र किसानों को कृषि और संबद्ध गतिविधियों के साथ-साथ घरेलू जरूरतों से संबंधित खर्चों को पूरा करने के लिए आर्थिक सहायता मिलती है।
शत-प्रतिशत केंद्रीय वित्त पोषण वाली यह योजना प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से संचालित होती है। योजना के तहत, देशभर के सभी पात्र किसानों को तीन समान किस्तों में प्रति वर्ष 6000 रुपये की नकद आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
कैग ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया कि राज्य के दिशानिर्देशों के अनुसार लाभार्थियों की पहचान के लिए कोई विधिवत अनुमोदित वैकल्पिक तंत्र नहीं होने से योजना के उचित कार्यान्वयन में बाधा आ रही है।
रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि राज्य नोडल विभाग राज्य में संभावित लाभार्थियों को निर्धारित करने के लिए औचित्य या आधार प्रदान नहीं कर सका। इसके कारण चार नमूना जिलों में से दो में कुल उपलब्ध लाभार्थियों से अधिक लोग पंजीकृत हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में ‘स्व पंजीकरण’ प्रक्रिया को ठीक से लागू नहीं किया गया जिसके कारण अनुचित तरीके से पंजीकरण निरस्त किये गये और 90 प्रतिशत पंजीकरण सत्यापन के लिए अभी लंबित हैं।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘उपयुक्त प्राधिकारियों के सत्यापन के बिना कुल 373 लाभार्थियों को पंजीकृत किया गया था और असत्यापित लाभार्थियों को 28.22 लाख रुपये का लाभ पहले ही दिया जा चुका है। 572 अपात्र लाभार्थियों को कुल 46.98 लाख रुपये का लाभ दिया गया है।’’
रिपोर्ट में कहा गया है कि सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के जरिये अतिरिक्त 95 लाख रुपये का वितरण किया गया है।
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