विदेश की खबरें | इंजीनियर प्राकृतिक चीजों से बना रहे बुलेटप्रूफ कोटिंग

ह्यूस्टन, 28 मई युद्धक्षेत्र में सैनिकों की रक्षा के लिए दो भारतीय-अमेरिकियों सहित तीन इंजीनियर अत्यधिक प्रभावी एवं कई परत वाली बुलेटप्रूफ कोटिंग तैयार करने के लिए झींगा, मशरूम और अन्य जीवधारियों से मिलने वाली सामग्री का इस्तेमाल कर पर्यावरण अनुकूल पॉलीमर बना रहे हैं।

ह्यूस्टन विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा कि इस कार्य को भारतीय मूल के दो इंजीनियरों सहित तीन लोग अंजाम दे रहे हैं। वे बुलेटप्रूफ कोटिंग तैयार करने के लिए संधिपाद प्राणियों (आर्थ्रपाड) और फफूंद की कोशिका भित्तियों में पाए जाने वाले ग्लूकोज यौगिक ‘चिटिन’ तथा 3डी प्रिंटिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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यह कोटिंग गोलियों की बौछार, लेजर हमले, जहरीली गैस और अन्य खतरों से सैनिकों की रक्षा कर सकती है।

भारतीय मूल के रसायन एवं जैव-आणविक अभियांत्रिकी प्रोफेसर आलमगीर करीम ने पीटीआई से कहा, ‘‘ये उत्पाद प्राकृतिक तरीके से नष्ट होने वाले उत्पाद होंगे और इस तरह वे नष्ट होकर वापस प्रकृति मां के पास लौट सकते हैं।’’

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विश्वविद्यालय ने कहा कि उसके यहां सामग्री अभियांत्रिकी कार्यक्रम के निदेशक करीम इस परियोजना के प्रधान अन्वेषक हैं जिसके लिए अमेरिका के रक्षा विभाग ने 6,60,000 डॉलर की राशि दी है।

इस कार्यक्रम से जुड़े भारतीय मूल के दूसरे इंजीनियर वेंकटेश बालन हैं जो अभियांत्रिकी प्रौद्योगिकी के सहायक प्रोफेसर हैं।

उन्होंने कहा कि इस काम में मशरूम का भी इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे मानक स्तर का ‘चिटिन’ मिलता है।

भारतीय मूल के इन दोनों इंजीनियरों के साथ राबर्टसन नाम के एक अन्य इंजीनियर भी परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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