जरुरी जानकारी | सभी मंत्रालयों, राज्यों में स्त्री-पुरूष समानता को बढ़ावा देने वाला बजट बने: डीएमईओ

नयी दिल्ली, सात जुलाई नीति आयोग के निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (डीएमईओ) ने महिलाओं के लिए एक राष्ट्रीय नीति को अंतिम रूप देने और सभी मंत्रालयों एवं राज्यों में स्त्री-पुरूष समानता को बढ़ावा देने वाला (जेंडर-आधारित बजट) बजट बनाने की व्यवस्था लागू करने के लिए ‘जेंडर बजटिंग अधिनियम' लाने की वकालत की है।

नीति आयोग से संबद्ध डीएमईओ ने 'शासन में स्त्री-पुरूष बराबरी को मुख्यधारा में लाने' पर केंद्रित अपनी रिपोर्ट में समानता स्थापित करने वाले सिद्धांतों को बजट-निर्माण प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की है।

हालांकि रिपोर्ट कहती है कि ‘जेंडर बजट’ की प्रक्रिया अधिकतर राज्यों में नहीं अपनाई जाती है और विभिन्न क्षेत्रों में चलाई जा रही कई योजनाओं में भी इसका अनुपालन देखने को नहीं मिलता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, "सभी मंत्रालयों एवं राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में स्त्री- पुरूष समानता आधारित बजट’ निर्माण को मुख्यधारा में लाने के लिए ‘जेंडर बजटिंग’ अधिनियम की जरूरत है। इससे आकड़े जुटाने वाले सभी संस्थान स्त्री-पुरूष आधार पर आंकड़ों के विश्लेषण एवं प्रकाशन के लिए कानूनी तौर पर बाध्य होंगे।"

डीएमईओ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि केंद्र सरकार की तरफ से चलाई जा रही 119 योजनाओं में से सिर्फ 62 योजनाएं ही ‘जेंडर-आधारित बजट’ प्रक्रिया का पालन कर रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, स्त्री-पुरुष विभेद पर आधारित नजरिये को मुख्यधारा में लेकर आना किसी भी नियोजित कार्य के निहितार्थों के महिलाओं एवं पुरुषों के हिसाब से आकलन करने की प्रक्रिया है।

यह सभी राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में संचालित नीतियों एवं कार्यक्रमों के डिजाइन, क्रियान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन में महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों की चिंताओं एवं अनुभवों को अनिवार्य अंग बनाने की एक रणनीति भी है। इस तरह महिलाओं एवं पुरुषों दोनों को ही समान रूप से लाभांवित होना सुनिश्चित किया जा सकता है।

इसके साथ ही डीएमईओ ने राष्ट्रीय महिला नीति को अंतिम रूप देने जरूरत भी बताई है। इसके लिए वर्ष 2016 की मसौदा नीति में कुछ संशोधन किए जा सकते हैं।

इस रिपोर्ट में डीएमईओ ने समाज में ‘ट्रांसजेंडर’ व्यक्तियों की सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया है।

प्रेम

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