देश की खबरें | बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप का वैशाली में मंगलवार को होगा उद्घाटन

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि 15 देशों के बौद्ध भिक्षु मंगलवार को वैशाली जिले में बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप के उद्घाटन में शामिल होंगे।

पटना, 28 जुलाई बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि 15 देशों के बौद्ध भिक्षु मंगलवार को वैशाली जिले में बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप के उद्घाटन में शामिल होंगे।

संग्रहालय की पहली मंजिल पर भगवान बुद्ध का पावन अस्थि कलश स्थापित किया गया है

कुमार ने सोमवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप, वैशाली का 29 जुलाई को लोकार्पण होने जा रहा है। इस लोकार्पण समारोह में दुनियाभर के करीब 15 देशों के बौद्ध धर्मावलंबी और बौद्ध भिक्षु बिहार आ रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह हम सभी बिहारवासियों के लिए गौरव का क्षण होगा। 72 एकड़ भूमि पर इस भव्य स्तूप का निर्माण राजस्थान के गुलाबी पत्थरों से किया गया है। इस परिसर का स्वरूप पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी काफी अच्छा बनाया गया है ताकि यहां आने वाले पर्यटकों को सुखद अनुभूति हो।’’

मुख्यमंत्री मंगलवार को बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह स्मारक स्तूप का उद्घाटन करेंगे।

नीतीश कुमार ने कहा, ‘‘स्तूप के प्रथम तल पर भगवान बुद्ध का पावन अस्थि कलश स्थापित किया गया है, जो स्मारक का प्रमुख केंद्र बिंदु होगा। भगवान बुद्ध का अस्थि अवशेष 6 जगहों से प्राप्त हुआ जिसमें वैशाली के मड स्तूप से जो अस्थि अवशेष मिले वह सबसे प्रामाणिक है। इसका जिक्र चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपनी पुस्तक में किया है।’’

ह्वेन त्सांग के नाम से भी पहचाने जाने वाले जुआंगजांग एक चीनी बौद्ध भिक्षु और विद्वान थे, जिन्होंने सातवीं शताब्दी ईसा पूर्व में राजा हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान भारत का भ्रमण किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘वैशाली एक ऐतिहासिक और पौराणिक भूमि है जिसने दुनिया को पहला गणतंत्र दिया। यह महिला सशक्तीकरण की भूमि भी रही है। यहीं पहली बार महिलाओं को बौद्ध संघ में शामिल किया गया।’’

कुमार ने कहा, ‘‘यह स्तूप बिहार की सांस्कृतिक धरोहर और वैश्विक बौद्ध विरासत का भव्य प्रतीक है। बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप न केवल वैशाली को वैश्विक बौद्ध मानचित्र पर प्रतिष्ठित करेगा बल्कि पर्यटन, संस्कृति और रोजगार को भी नयी दिशा देगा।’’

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