जरुरी जानकारी | दिल्ली में बीएसईएस के ग्राहकों ने छतों पर पैदा की 100 मेगावट सौर बिजली
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. राजधानी दिल्ली में बीएसईएस समूह की विद्युत वितरण कंपनियों के ग्राहकों ने छतों पर सौर-पैनल लगा कर 100 मेगावाट से अधिक सौर बिजली पैदा की है। कंपनी के अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि इससे ग्राहकों को साल में 68 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हो रही है।
नयी दिल्ली , 27 फरवरी राजधानी दिल्ली में बीएसईएस समूह की विद्युत वितरण कंपनियों के ग्राहकों ने छतों पर सौर-पैनल लगा कर 100 मेगावाट से अधिक सौर बिजली पैदा की है। कंपनी के अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि इससे ग्राहकों को साल में 68 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हो रही है।
बीएसईएस के एक प्रवक्ता ने कहा कि बीएसईएस राजधानी पावर लि. (बीआरपीएल) और बीएसईएस यमुना पावर लि. (बीवाईपीएल) ने अपने-अपने क्षेत्र में 3,100 से अधिक रूफटॉप सौर मीटरिंग कनेक्शन चालू किए। इनमें 1,805 कनेक्शन घरेलू, 665 विद्यालयों और 554 कनेक्शन वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के हैं।
अधिकारी ने कहा बीएसईस की ये अनुषंगी कंपनियां दक्षिण दिल्ली, पश्चिम दिल्ली, पूर्वी दिल्ली और मध्य दिल्ली के अपने इलाकों में लोगों को अपनी छतों पर सौर-बिजली पैनल लगाने को प्रोत्साहित कर रही हैं।
उसने कहा, ‘‘छतों पर कुल 3,140 सौरबिजली पैनलों की स्थापना की जा चुकी है, जिनसे कुल 106 मेगा वाट बिजली उपभोग के उपकरण जुड़े हैं। अगले वित्त वर्ष में बीएसईएस की इन कंपनियों ने अपने इलाकों में और 1000 रूफटॉप सौर कनेक्शन स्थापित कराने का लक्ष्य रखा है।’’
अधिकारी ने विश्लेषण के आधार पर बताया कि इन सौर पैनलों की क्षमता में 43 मेगावाट बिजली का उपयोग शैक्षणिक संस्थानों, 28 मेगावाट का वाणिज्यिक संस्थानों, 23 मेगावाट घरों, 3 मेगावाट औद्योगिक प्रतिष्ठानों और 3 मेगावाट क्षमता के कनेक्शन अन्य उपयोग के लिए हैं।
बीएसईएस के अनुसार दिल्ली में सहकारी सामूहिक आवास समितियों और अपार्टमेंटों में सौरबिजली पैनल की लोकप्रियता सबसे अधिक है। करीब 90 समितियां और अपार्टमेंट ने इसको अपनाया है।
दिल्ली सौरविद्युत नीति के दस्तावेजों के अनुसार, राजधानी में 31 वर्ग किलो मीटर के दायरे में सौरपैनल स्थापित किए जाने की गुंजाइश है। राजधानी में साल में करीब 300 दिन धूप खिली रहती है। इस तरह यहां 2,500 मेगावाट सौर बिजली उत्पादित किए जाने की संभावना है।
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