दिल्ली में छात्रों पर बर्बरता से लाठीचार्ज, पीएम मोदी चुप
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

बिना नेम प्लेट वाले सुरक्षाकर्मियों ने दिल्ली में संसद की तरफ मार्च कर बढ़ रहे युवाओं पर लाठीचार्ज किया है. युवा, मोदी सरकार से शिक्षा तंत्र में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं.नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में हो रहे छात्र आंदोलन पर दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने लाठीचार्ज किया है. सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही कई तस्वीरों और वीडियोज में लहूलुहान युवा दिखाई पड़ रहे हैं. सड़क पर बिखरी कई चप्पलों के बीच हेल्मेट और कवच पहले सुरक्षाकर्मी उन छात्रों को पीट रहे हैं जो बिल्कुल निहत्थे थे. कुछ वीडियोज में सुरक्षाकर्मी भीड़ से अलग युवाओं को ताकत के बर्बर इस्तेमाल के साथ घसीटते भी दिख रहे हैं. नीले रंग की वर्दी में लाठीचार्ज करने वाले कई सुरक्षाकर्मियों की ड्रेस में कोई नेम प्लेट भी नहीं थी.

सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने प्रशासन पर "शांतिपूर्ण प्रदर्शकारियों" को "बर्बर तरीके से दबाने" के आरोप लगाए हैं. वहीं केंद्र सरकार के अधीन आने वाली दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी, उन इलाकों में दाखिल होने की कोशिश कर रहे थे, जहां जाने की अनुमति उन्हें नहीं थी. सीजेपी के अगुवाई में देश भर से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली पहुंचे हैं. सीजेपी ने सोमवार से शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र के दौरान "संसद चलो" का आह्वान किया था. दिल्ली पुलिस युवाओं को संसद पहुंचने से रोकने की कोशिश करती रही.

अलग अलग समाचार एजेंसियों और स्थानीय मीडिया के मुताबिक, कुछ जगहों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे और जमकर लाठीचार्ज भी किया. मार्च के दौरान कई युवाओं के पीठ पर बैग था और हाथ में भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा.

नरेंद्र मोदी की राजनीतिक छवि पर गहरा बट्टा

छात्र व सामाजिक कार्यकर्ता, भारत के शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं. आमरण अनशन के साथ दिल्ली के जंतर मंतर में इस आंदोलन की शुरुआत करने वाले वैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ, जिस तरह से दिल्ली पुलिस ने व्यवहार किया, उससे भी यह आंदोलन और तेज हुआ है.

अब सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके करेंगे भूख हड़ताल

सोमवार के मार्च के दौरान राजधानी नई दिल्ली में प्रधान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे भी गूंजते रहे. करीब 21 दिन से जारी इस आंदोलन को लेकर अब तक भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोई बयान नहीं दिया है. पीएम मोदी की यही चुप्पी अब लोगों को चुभ रही है.

असल में अब तक मोदी अपनी एक मजबूत राजनीतिक प्रशासक वाली छवि बचाने में सफल होते रहे हैं, लेकिन यह पहला मौका है जब यह छवि तितर बितर होती नजर आ रही है. बीजेपी शासित कई राज्यों के राम मंदिर समेत तमाम मंदिरों में चढ़ावे की चोरी के मामले सामने आ रहे हैं. दूसरी तरफ बीजेपी शासित राज्यों में भ्रष्टाचार और परिवारवाद के गंभीर मामले सामने आ रहे हैं. इन मुद्दों पर नरेंद्र मोदी चुप हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी. उल्टा, शिकायत करने वालों या दूसरे दलों के लोगों के खिलाफ ईडी या पुलिस की कार्रवाइयां किसी से छुपी नहीं हैं.

सोमवार को मार्च में शामिल एक योग शिक्षिका, ज्योति राजपूत ने समाचार एजेंसी एपी से कहा, "यह सड़ा हुआ सिस्टम कार्रवाई करने से इनकार करता है. ये छात्रों का दर्द नहीं देख सकता है, और इसीलिए कई लोग इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं."

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की युवाओं को कॉकरोच कहने वाली टिप्पणी, नीट पेपर लीक और उसके बाद कई छात्रों की आत्महत्या से उपजा यह प्रदर्शन अब सरकार के खिलाफ एक बड़े आक्रोश की शक्ल ले रहा है. नई दिल्ली में मार्च कर रही 26 साल की एक छात्रा स्नेहा के मुताबिक, "मैंने इस सरकार के लिए वोट दिया, तो अब मुझे लगता है कि वह हमारे सवालों का जवाब देने के लिए जवाबदेह है."

सोमवार को संसद मार्च शुरू होने और युवाओं के काफी हद तक संसद के करीब पहुंचने के बाद बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और भारत के स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने छात्रों से धरना प्रदर्शन खत्म करने की अपील की. नड्डा ने सीजेपी के दो नेताओं से मुलाकात की और फिर हालात का सामान्य बनाने में मदद करने की अपील करते हुए इस आंदोलन को खत्म करने की अपील की.

वहीं सीजेपी के नेताओं ने नड्डा के सामने तीन स्पष्ट मांगें रखी हैं. ये मांगे हैं: सोनम वांगचुक की तुरंत रिहाई, धमेंद्र प्रधान का इस्तीफा और नीट परीक्षा के चलते आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा.

सीपीजे के नेताओं के मुताबिक, सरकार ने अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है. वहीं सीजेपी के नेताओं का यह भी कहना है कि दिल्ली पुलिस की सोमवार को की गई कार्रवाई के बाद, जंतर मंतर पर उनका प्रदर्शन जारी रहेगा.