देश की खबरें | बीआरएस सांसद बजट सत्र में अडानी से लेकर राज्यपाल तक के मुद्दे उठाएं: चंद्रशेखर राव

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के संसदीय दल ने देश के हालात पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए रविवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा अपनाई गई 'दुर्भाग्यपूर्ण नीतियों' के कारण स्थिति दिन-ब-दिन 'बिगड़ती' जा रही है।

हैदराबाद, 29 जनवरी भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के संसदीय दल ने देश के हालात पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए रविवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा अपनाई गई 'दुर्भाग्यपूर्ण नीतियों' के कारण स्थिति दिन-ब-दिन 'बिगड़ती' जा रही है।

एक बयान में कहा गया है कि बीआरएस अध्यक्ष और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर ने पार्टी सांसदों को निर्देश दिया कि वे संसद के बजट सत्र में ''जनविरोधी नीतियों'' पर अमल करने वाले केंद्र का ‘पर्दाफाश’ करें।

राव के दफ्तर से जारी बयान के मुताबिक, उन्होंने कहा कि संसद के सत्र के दौरान केंद्र की गलतियों को सामने लाना चाहिए तथा राज्य के लोगों के साथ-साथ देश के लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाना चाहिए।

बयान में कहा गया है कि पार्टी प्रमुख राव की अध्यक्षता में आज प्रगति भवन में बीआरएस संसदीय दल की बैठक हुई।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र की "अलोकतांत्रिक राजनीति" को हर संभव लोकतांत्रिक तरीके से सामने लाया जाना चाहिए और इस दिशा में बीआरएस को अन्य दलों के साथ मिलकर संसद के दोनों सदनों में केंद्र सरकार को बेनकाब करना चाहिए।

बयान में राव ने आरोप लगाया है, “ भाजपा नीत केंद्र सरकार द्वारा अपनाई गई नीतियां देश की अखंडता और विकास के लिए बाधक बन गई हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।केंद्र मनमाने ढंग से लोगों की गाढ़ी कमाई का पैसा अपने उद्योगपति मित्रों को दे रहा है।”

उन्होंने आरोप लगाया, “ केंद्र सरकार अपनी मित्र कॉरपोरेट ताकतों के प्रति विशेष स्नेह दिखा रही है और लाखों करोड़ रुपये के ऋण माफ कर रही है। एलआईसी जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के शेयर अडानी जैसे बड़े उद्योगपतियों को स्थानांतरित किए जा रहे हैं।”

राव ने दावा किया कि केंद्र सरकार राज्यपाल व्यवस्था का भी “दुरुपयोग” कर रही है और राज्यों को कमजोर करने के लिए उनका इस्तेमाल किया जा रहा है।

राव ने अपनी पार्टी के सांसदों को हिदायत दी कि वे राज्यपाल व्यवस्था का इस्तेमाल करने की “ खराब नीतियों” का दोनों सदनों में कड़ा विरोध करें।

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