देश की खबरें | संथाल के मजदूरों को 20 प्रतिशत अधिक मजदूरी के साथ लद्दाख ले जायेगा बीआरओ

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और साथ ही हम सीमा क्षेत्रों में राष्ट्र की सेवा करते हुए अपने श्रमिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करने को समान प्राथमिकता देते हैं इसी कारण राज्य के संथाल क्षेत्र के 11815 मजदूरों को नयी शर्तों के तहत अब बीस प्रतिशत अधिक मजदूरी पर लद्दाख भेजा जायेगा।

जियो

रांची, आठ जून झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और साथ ही हम सीमा क्षेत्रों में राष्ट्र की सेवा करते हुए अपने श्रमिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करने को समान प्राथमिकता देते हैं इसी कारण राज्य के संथाल क्षेत्र के 11815 मजदूरों को नयी शर्तों के तहत अब बीस प्रतिशत अधिक मजदूरी पर लद्दाख भेजा जायेगा।

आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज इस बात की जानकारी दी।

यह भी पढ़े | कोविड-19 के उत्तराखंड में 31 नए मरीज पाए गए: 8 जून 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘राज्य सरकार केंद्रीय रक्षा मंत्रालय को सहयोग देने के लिए सदैव तैयार है। लेकिन वह अपने मजदूरों के हितों और अधिकारों को भी समान प्राथमिकता देती है।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बीस प्रतिशत अधिक वेतन के साथ यहां के मजदूर लद्दाख जायेंगे जिसके लिए बीआरओ से समझौता हो गया है।

यह भी पढ़े | कोरोना संकट के चलते मास्क और पीपीई किट के साथ ऑक्सीमीटर की भी मांग बढ़ी.

प्रवक्ता ने बताया कि राज्य सरकार के हस्तक्षेप के बाद संथाल परगना के 11, 815 श्रमिकों को सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के लिए पूरे अधिकार के साथ काम करने का अवसर मिलेगा। लॉकडाउन के कारण लेह-लद्दाख से लौटे प्रवासी

मजदूरों की आपबीती सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने वैधानिक शर्तों और श्रमिकों को सभी लाभ देने की लिखित सहमति मिलने के बाद श्रमिकों को ले जाने की अनुमति बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) को दी गयी है। अब इन मजदूरों को निर्धारित मजदूरी की राशि में 20 प्रतिशत अधिक मजदूरी सीधे उनके बैंक खाते में जमा होगी।

उन्होंने बताया कि बीआरओ और उपायुक्त के बीच पंजीकरण प्रक्रिया के बाद ही श्रमिक लद्दाख जाएंगे जिससे बिचैलियों की भूमिका खत्म हो गई है। अब इन श्रमिकों को चिकित्सा सुविधा, यात्रा भत्ता, कार्य स्थल पर सुरक्षा, आवास

लाभ भी मिलेगा।

संथाल परगना से हजारों आदिवासी श्रमिक 1970 से लेह-लद्दाख के दुर्गम स्थान, कठिनतम चोटियों और दर्रों पर विशेषकर सड़क बनाने जाते हैं। बीआरओ अपने स्थानीय नेटवर्क की मदद से इन्हें साल में दो बार बुलाता है। एक बार

अप्रैल-मई में श्रमिक वहां जाते हैं और इन्हें सितंबर तक लौटना होता है।

दूसरी बार अक्तूबर-नवंबर के दौरान श्रमिक लद्दाख जाते हैं और फरवरी में वह लौटने लगते हैं। लेकिन इस बार लॉकडाउन के कारण श्रमिक वहां फंस गए।

श्रमिकों ने सीएमओ और कॉल सेंटर से संपर्क कर वापसी की गुहार लगाई जिसके बाद मुख्यमंत्री ने टीम बनाई और 29 मई को 60 श्रमिक एयरलिफ्ट कर रांची लाये गए।

विमान से झारखण्ड पहुंचे श्रमिकों ने कहा कि वहां पर उन्हें समय पर मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाता है। बीआरओ द्वारा तय राशि से कम राशि का भुगतान ठेकेदार और बिचैलिए करते हैं। हमारा एटीएम कार्ड ठेकेदार रख लेते

हैं, और झारखंड लौटने समय हमारी मेहनत की राशि बिचैलियों द्वारा एक तिहाई निकाल कर एटीम कार्ड उन्हें सौंपे जाते हैं।

सरकार ने दावा किया कि नयी व्यवस्था के तहत अब मजदूरों को इस तरह की समस्या से दो-चार नहीं होना पड़ेगा।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\