ग्रेटर नोएडा, 28 मार्च भारतीय मुक्केबाज निशांत देव का मानना है कि शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण पेशेवर सर्किट में खेलने से उन्हें सहनशीलता विकसित करने में मदद मिलेगी, जो 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के उनके सपनों को पूरा करने में मददगार होगा।
पेरिस ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में करीबी हार का सामना करने वाले निशांत इस खेल की ओलंपिक में बने रहने की अनिश्चितता के बीच पेशेवर मुक्केबाजी से जुड़ गये।
एमेच्योर मुक्केबाजी में एक मुकाबला अधिकतम नौ मिनट तक चलता है जिसमें तीन-तीन मिनट के तीन राउंड होते हैं, जबकि पेशेवर मुक्केबाजी में मुकाबले 12 राउंड तक भी चल सकते हैं।
निशांत ने यहां महिला राष्ट्रीय चैंपियनशिप के आखिरी दिन कहा, ‘‘ मेरे लिए पेशेवर मुक्केबाजी में जाने का सबसे बड़ा कारण यह था कि मेरी सहनशक्ति और ताकत कम थी। मैं इसे सुधारने के लिए पेशेवर मुक्केबाजी में शामिल हो गया क्योंकि मैं पेशेवर मुक्केबाजी में ज्यादा राउंड खेलने का आदी हो जाऊं और जब मैं एमेच्योर मुक्केबाजी में वापस आऊं, तो मैं तीन दौर तक आराम से खेल सकूं।’’
विश्व चैम्पियनशिप(2023) लाइट मिडिल वर्ग (71 किग्रा) के कांस्य पदक विजेता निशांत हाल के वर्षों में भारत के लिए सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले मुक्केबाजों में से एक रहे हैं।
उन्होंने ‘मैचरूम बॉक्सिंग’ के साथ तीन साल का करार किया है, जो लॉस एंजिल्स ओलंपिक से एक साल पहले समाप्त होग।
ओलंपिक पदक का सपना संजोये निशांत ने कहा, ‘‘ मुक्केबाजी ओलंपिक में बना रहेगा और मेरा अनुबंध ओलंपिक के करीब समाप्त हो रहा है। इसलिए मैं भारत वापस आऊंगा और क्वालीफायर खेलूंगा।’’
बीएफआई अध्यक्ष अजय सिंह ने भी निशांत की राष्ट्रीय टीम में वापसी के लिए दरवाजा खुला रखा है।
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