बंबई उच्च न्यायालय ने आईएलएफएस की दो लेखा फर्मों के खिलाफ रद्द किया मुकदमा
बीएसआर और डेलॉयट ने पिछले साल एनसीएलटी के समक्ष केंद्र सरकार की याचिका की वैधता को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय के समक्ष राहत देने की गुहार लगाई थी। केंद्र सरकार ने अपनी याचिका में इन कंपनियों को आईएलएफएस के लेखाकार पद से हटाने की मांग की थी।
मुंबई, 21 अप्रैल बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को आईएलएफएस फाइनेंशियल सर्विसेस के दो पूर्व लेखाकारों पर लंबित सभी मुद्दों को रद्द कर दिया। अदालत ने बीएसआर एंड एसोसिएट्स और डेलॉयट हास्किन्स एंड सेल्स को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) और एक विशेष अदालत में लंबित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में राहत देदी।
बीएसआर और डेलॉयट ने पिछले साल एनसीएलटी के समक्ष केंद्र सरकार की याचिका की वैधता को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय के समक्ष राहत देने की गुहार लगाई थी। केंद्र सरकार ने अपनी याचिका में इन कंपनियों को आईएलएफएस के लेखाकार पद से हटाने की मांग की थी।
कंपनी कानून की धारा 140 (5) के तहत इस तरह निष्कासन होने पर लेखा फर्मों पर पांच साल के लिए प्रतिबंध भी लग जाएगा।
कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने इस तरह के निष्कासन की मांग की थी और दिवालिया हो चुके आईएलएफएस समूह में कथित वित्तीय अनियमितताओं में उनकी भूमिका के लिए आपराधिक कार्यवाही भी शुरू की थी।
पिछले साल अगस्त में एनसीएलटी ने केंद्र सरकार की याचिका को सही पाया था और बाद में दोनों फर्मों के प्रस्तावित निष्कासन को मंजूरी दे दी थी।
हालांकि, फर्मों ने यह कहते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया कि मंत्रालय द्वारा उन्हें हटाने की मांग करने से पहले ही उन्होंने आईएलएफएस के लेखाकार की भूमिका से इस्तीफा दे दिया था।
मुख्य न्यायाधीश बी. पी. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति एन. आर. बोरकर की पीठ ने मंगलवार को दोनों फर्मों के खिलाफ एनसीएलटी के समक्ष मुकदमों को खारिज कर दिया।
बीएसआर के कानूनी दल का हिस्सा रहे अधिवक्ता सुजय कांतवाला ने कहा कि केंद्र सरकार ने इन मुकदमों को रद्द करने के उच्च न्यायालय के आदेश पर आठ सप्ताह तक रोक लगाने की मांग की।
हालांकि, बीएसआर और डेलॉयट के वकीलों ने इसका विरोध किया, लेकिन अदालत ने अपने आदेश पर इस रोक को मंजूरी दे दी।
कांतवाला ने कहा कि अदालत ने यह कहते हुए फैसले पर रोक लगा दी कि सरकार को अपील के लिए समय देने से इनकार करना सही नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि मुकदमों को रद्द करने के लिए मंगलवार का आदेश ‘‘निर्दोष फर्मों का उत्पीड़न रोकने’’ में एक मिसाल की तरह काम करेगा।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, लेटेस्टली स्टाफ ने इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया है)
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 21, 2020 06:49 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

