देश की खबरें | बंबई उच्च न्यायालय ने नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को गर्भपात कराने की मंजूरी दी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बंबई उच्च न्यायालय ने 17 वर्षीय बलात्कार पीड़िता को गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है। वह 25 सप्ताह की गर्भवती है और सरकारी केईएम अस्पताल ने गर्भपात न कराने की सलाह दी थी लेकिन इसके बावजूद अदालत ने गर्भपात की मंजूरी दे दी है।

मुंबई, एक जुलाई बंबई उच्च न्यायालय ने 17 वर्षीय बलात्कार पीड़िता को गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है। वह 25 सप्ताह की गर्भवती है और सरकारी केईएम अस्पताल ने गर्भपात न कराने की सलाह दी थी लेकिन इसके बावजूद अदालत ने गर्भपात की मंजूरी दे दी है।

न्यायमूर्ति के के तातेड़ और न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव की खंडपीठ ने लड़की के पिता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को यह आदेश दिया। याचिका में लड़की का गर्भपात कराने की मंजूरी मांगी गई थी जो अभी 25 सप्ताह की गर्भवती है।

यह भी पढ़े | पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन : 1 जुलाई 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

याचिका के अनुसार लड़की के साथ बलात्कार हुआ था और दोषियों के खिलाफ मुंबई के वाकोला पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है।

चिकित्सीय गर्भपात कानून के प्रावधानों के तहत अगर कोई महिला 20 हफ्ते से अधिक की गर्भवती है तो उसे गर्भपात की अनुमति नहीं है और उसे ऐसा करने के लिए उच्च न्यायालय से अनुमति लेनी होगी।

यह भी पढ़े | कोरोना संकट में ड्यूटी से गायब रहने वाले मुंबई पुलिस के 6 कांस्टेबलों पर गिरी गाज, केस हुआ दर्ज.

पीड़िता ने अपनी याचिका में चिकित्सीय गर्भपात की अनुमति मांगते हुए कहा कि उसके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को खतरा है।

अदालत ने गत सप्ताह याचिकाकर्ता को जांच के लिए मुंबई के केईएम अस्पताल के चिकित्सा बोर्ड के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए थे और बोर्ड से रिपोर्ट मांगी थी।

बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में गर्भपात न कराने की सलाह दी और कहा कि अगर गर्भावस्था जारी रहती है तो स्वस्थ बच्चे का जन्म कराया जा सकता है और याचिकाकर्ता और उसका परिवार फिर फैसला ले सकते हैं कि वे बच्चे की देखभाल करना चाहते हैं या उसे गोद देना चाहते हैं।

बोर्ड ने कहा कि याचिकाकर्ता मनोवैज्ञानिक सहयोग और काउंसिलिंग के साथ बच्चे की देखभाल करने में सक्षम होनी चाहिए।

बहरहाल पीठ ने अपने आदेश में कहा कि मौजूदा मामले में बलात्कार के कारण लड़की गर्भवती हुई और इसमें कोई शक नहीं है कि इस गर्भावस्था को जारी रखने से याचिकाककर्ता के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर आघात हो रहा है।

अदालत ने याचिकाकर्ता को चिकित्सीय गर्भपात कराने की मंजूरी दे दी।

अदालत ने कहा, ‘‘अगर गर्भपात के दौरान बच्चे का जीवित रहते हुए जन्म होता है और अगर याचिकाकर्ता तथा उसके माता-पिता बच्चे की जिम्मेदारी लेना नहीं चाहते या इस स्थिति में नहीं हैं तो राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों को बच्चे की पूरी जिम्मेदारी उठानी होगी।’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

PBKS vs LSG, IPL 2026 29th Match Winner Prediction: टूर्नामेंट के 29वें मुकाबले में लखनऊ सुपर जायंट्स को हराकर जीत की लय बरकरार रखना चाहेगी पंजाब किंग्स, मैच से पहले जानें कौनसी टीम मार सकती है बाजी

RSAW vs INDW, 2nd T20I Match Live Score Update: किंग्समीड में दक्षिण अफ्रीका महिला बनाम भारत महिला के बीच खेला जा रहा है दूसरा टी20 मुकाबला, यहां देखें मैच का लाइव स्कोर अपडेट

Rahul Gandhi Citizenship Case: राहुल गांधी नागरिकता विवाद मामला, इलाहाबाद HC कल सुनेगा कांग्रेस नेता का पक्ष, FIR के आदेश पर फिलहाल रोक

KKR vs RR, IPL 2026 28th Match Scorecard: ईडन गार्डन्स स्टेडियम में राजस्थान रॉयल्स ने कोलकाता नाइट राइडर्स के सामने रखा 156 रनों का टारगेट, वैभव सूर्यवंशी ने खेली धमाकेदार पारी; यहां देखें पहली पारी का स्कोरकार्ड