देश की खबरें | चकाचौंध से भरे जीवन जीने का ‘अंध-अनुकरण’ दुर्भाग्यपूर्ण : सीजेआई रमण
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एन.वी. रमण ने शुक्रवार को यहां कहा कि वैश्वीकरण की अंधी दौड़ से प्रभावित होकर लोग वैश्विक संस्कृति की ओर मुखातिब हो रहे हैं, जो स्थानीय सांस्कृतिक पहचान और प्रतीकों के लिए खतरा बनकर उभरा है।
हैदराबाद, पांच अगस्त भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एन.वी. रमण ने शुक्रवार को यहां कहा कि वैश्वीकरण की अंधी दौड़ से प्रभावित होकर लोग वैश्विक संस्कृति की ओर मुखातिब हो रहे हैं, जो स्थानीय सांस्कृतिक पहचान और प्रतीकों के लिए खतरा बनकर उभरा है।
सीजेआई ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया, टेलीविजन एवं पॉप संस्कृति जीवन के एक खास तरीके को आकर्षित करती हैं और दुर्भाग्यवश लोग उसका ‘अंध-अनुकरण’ कर रहे हैं।
उस्मानिया विश्वविद्यालय के 82वें दीक्षांत समारोह में अपने सम्बोधन में न्यायमूर्ति रमण ने कहा कि सभी संस्थानों के लिए यह माकूल वक्त है कि वे पाठ्यक्रमों से इतर संविधान और शासन से संबंधित मूल सिद्धांतों को लेकर एक विषय शुरू करें।
उन्होंने कहा कि चूंकि वैश्विक संस्कृति पूरी दुनिया को अपने प्रभाव में ले रही है, विविधता को कायम रखने की आवश्यकता का व्यापक महत्व है।
सीजेआई ने हालांकि स्पष्ट किया कि उनकी इन टिप्पणियों को वैश्वीकरण की आलोचना के तौर पर नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा मुद्दे निश्चित तौर पर यह साबित करते हैं कि वैश्वीकरण के मौजूदा मॉडल के साथ कुछ गलत हो चुका है।
उन्होंने कहा, ‘‘यद्यपि हमने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन हमारे समाज के बीच धन और संसाधनों की पहुंच को लेकर खाई बढ़ रही है।’’
न्यायमूर्ति रमण ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण प्रदूषण भी व्यापक दुष्प्रभाव डाल रही हैं, जिसकी वजह से व्यापक पारिस्थितिकीय असंतुलन की स्थिति पैदा हो गयी है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय ने न्यायमूर्ति रमण को डॉक्ट्रेट की मानद उपाधि दी।
तेलंगाना की राज्यपाल टी. सौंदरराजन ने भी दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
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