देश की खबरें | आजादी की लड़ाई से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों से खिलवाड़ कर रहे हैं भाजपा के लोग: गहलोत

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जयपुर, 17 जनवरी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के लोगों ने देश की आजादी की लड़ाई से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों से खिलवाड़ का अभियान चलाया हुआ है।

गहलोत ने ‘एक्स’ पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान का हवाला दिया।

खरगे ने कहा था कि जो लोग अपने इतिहास को तोड़ने-मरोड़ते हैं वे कभी इतिहास नहीं बना पाते। गहलोत के अनुसार, “भाजपा-आरएसएस के लोगों ने आजादी की लड़ाई और उससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों से खिलवाड़ करने का अभियान चलाया हुआ है।”

उन्होंने कहा कि इतिहास और वर्तमान में तमाम ऐसे उदाहरण हैं जब सत्ता में आए एक तरह की सोच के संगठनों ने इतिहास को गलत तथ्यों से लिखने की कोशिश की पर वे इतिहासकारों की नजर में मजाक का पात्र बन गए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, भगत सिंह, मौलाना आजाद समेत तमाम नेताओं का विशेष योगदान रहा, जो इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया और हमेशा अमिट रहेगा।

उन्होंने कहा कि इससे वे (भाजपा-आरएसएस) कितनी भी छेड़छाड़ का प्रयास करें वो सत्य को नहीं बदल पाएंगे।

गहलोत ने पोस्ट में कहा कि पाकिस्तान में जब जिया उल हक सत्ता में आए तो उन्होंने वहां के इतिहास का पुनर्लेखन शुरू किया और वहां की किताबों में 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की विजयगाथा लिखवायी और ऐसा ही अब बांग्लादेश में किया जा रहा है, जहां शेख मुजीबुर्रहमान का नाम बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम से हटाने का प्रयास हो रहा है।

उन्होंने कहा, “ऐसे प्रयासों से दुनिया में इन देशों की विश्वसनीयता ही खत्म होती जा रही है।”

गहलोत ने इसके साथ ही एक अन्य पोस्ट में किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के अनशन का मुद्दा भी उठाया।

उन्होंने कहा, “डल्लेवाल को अब अनशन करते हुए अब 51 दिन हो गए हैं। उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है। इन 51 दिनों में केन्द्र सरकार एवं पंजाब सरकार ने पूरी तरह असंवेदनशीलता का परिचय दिया है। यही वजह है कि अब 111 अन्य किसान भी अपनी बात सरकार के सामने रखने के लिए आमरण अनशन करने पर मजबूर हो गए हैं।”

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “यह समझ के परे है कि बार-बार ऐसी स्थिति क्यों बनती है और सरकार किसानों के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता कर समाधान क्यों नहीं निकालना चाहती।”

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