देश की खबरें | भाजपा सांसदों ने ज्ञानवापी मस्जिद में एएसआई सर्वेक्षण की अनुमति संबंधी उच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत किया

नयी दिल्ली, तीन अगस्त भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं ने उत्तर प्रदेश में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के एएसआई सर्वेक्षण की अनुमति देने संबंधी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अब स्थल पर मंदिर के बारे में ‘‘सच्चाई’’ सामने आ जायेगी।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के सर्वेक्षण के खिलाफ दाखिल अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी की याचिका बृहस्पतिवार को खारिज कर दी।

अंजुमन इंतेजामिया कमेटी ने वाराणसी की जिला अदालत के 21 जुलाई के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

अंजुमन इंतेजामिया कमेटी ने ज्ञानवापी मस्जिद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सर्वेक्षण की अनुमति देने संबंधी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय का रुख किया।

उच्च न्यायालय ने कहा कि जिला अदालत का आदेश उचित है और इस अदालत के हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।

फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि उच्च न्यायालय का फैसला संविधान के मुताबिक है।

उन्होंने संसद के बाहर पत्रकारों से कहा, ‘‘यह एक अच्छा फैसला है। हम भारतीयों के लिए यह उम्मीद भरा है। सच हमेशा सामने आता है, समय लगता है लेकिन सच सामने आ ही जाता है। मुगलकाल में जिस तरह से मंदिर को तोड़कर ढांचा खड़ा किया गया था...उस ज्ञानवापी को हम मस्जिद नहीं कह सकते। यह एक मंदिर है और वैसा ही रहेगा।’’

ठाकुर ने कहा, ‘‘जब सर्वेक्षण होगा तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि हमारे प्रतीक वहां हैं...मंदिर वहीं है।’’

भाजपा सांसद महंत बालकनाथ ने भी फैसले की सराहना करते हुए कहा कि यह तथ्यों पर आधारित है। उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग लंबे समय तक तथ्यों को छुपाने के लिए झूठ का सहारा ले रहे थे, अब सच सामने आयेगा।’’

इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए उत्तर प्रदेश से भाजपा के राज्यसभा सदस्य हरनाथ सिंह यादव ने भी अदालत के फैसले का स्वागत किया।

उन्होंने संसद के बाहर पत्रकारों से कहा, ‘‘मुस्लिम समाज को इस फैसले को स्वीकार करना चाहिए। अब इस सर्वेक्षण से सब कुछ साफ हो जाएगा...‘दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा।’

अमरोहा से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सांसद दानिश अली ने कहा कि उपासना स्थल अधिनियम, 1991 को पूर्ण रूप से लागू किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘नहीं तो ऐसा ही होता रहेगा, लोग मस्जिद में मंदिर ढूंढेंगे और कोई मंदिर में मठ ढूंढेगा। हर दिन खुदाई जारी रह सकती है। कुछ राजनीतिक दल जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए राजनीतिक फायदा उठाते रहेंगे।’’

मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद एस. टी. हसन ने कहा, ‘‘हम अदालत के फैसले का पालन करेंगे। हम उम्मीद करते हैं कि एएसआई ईमानदारी से सर्वेक्षण करेगा जैसा कि उसने बाबरी मस्जिद में किया था, जहां उसने रिपोर्ट दी थी कि वहां मंदिर के कोई निशान नहीं थे। क्या फैसला आता है यह तो समय ही बतायेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन आज हमें सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने और देश की दो बड़े समुदायों के बीच भाईचारा बढ़ाने की जरूरत है।’’

हसन ने दलील दी कि उस मस्जिद में 350 वर्ष से नमाज अदा होती आ रही है, इसलिए उसे मस्जिद नहीं तो और क्या कहा जायेगा।’’

सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने की अपील करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘क्या अल्लाह और ईश्वर एक ही चीज नहीं हैं? हम उसे भी बांट रहे हैं।’’

वाराणसी की एक अदालत ने 21 जुलाई को काशी विश्वनाथ मंदिर के पास स्थित मां श्रृंगार गौरी-ज्ञानवापी मस्जिद मामले में हिंदू पक्ष की मांग को स्वीकार करते हुए वजूखाने को छोड़कर पूरे ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक एवं वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने की अनुमति दे दी थी।

उच्चतम न्यायालय ने 24 जुलाई को वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में एएसआई के ‘विस्तृत वैज्ञानिक सर्वेक्षण’ पर 26 जुलाई को शाम पांच बजे तक रोक लगा दी थी।

इसके बाद मस्जिद का प्रबंधन करने वाली अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी ने इसके खिलाफ 25 जुलाई को उच्च न्यायालय का रुख किया था।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश प्रितिंकर दिवाकर ने सभी पक्षों को सुनने के बाद 27 जुलाई को अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था।

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