ताजा खबरें | राज्यसभा में भाजपा सदस्य ने की देश में डायलिसिस केंद्रों की संख्या बढ़ाने की मांग

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राज्यसभा में मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक सदस्य ने गुर्दे की बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ने पर चिंता जताते हुए, देश भर में डायलिसिस केंद्रों की संख्या बढ़ाने की मांग की।

नयी दिल्ली, 29 मार्च राज्यसभा में मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक सदस्य ने गुर्दे की बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ने पर चिंता जताते हुए, देश भर में डायलिसिस केंद्रों की संख्या बढ़ाने की मांग की।

शून्यकाल के दौरान भाजपा सदस्य नरहरि अमीन ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश में गुर्दे की बीमारी के मरीजों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है और करीब तीन करोड़ लोगों को गुर्दे काम नहीं करने की वजह से डायलिसिस कराना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि एक बार डायलिसिस कराने पर करीब 2,000 रुपये का खर्च आता है।

अमीन ने कहा कि देश भर में करीब 5,000 डायलिसिस केंद्र हैं और इनमें से ज्यादातर केंद्र शहरी क्षेत्रों में हैं।

उन्होंने कहा कि इस वजह से ग्रामीण इलाकों के लोगों को डायलिसिस के लिए शहरों में आने का खर्च भी वहन करना पड़ता है जबकि बीमारी के इलाज की वजह से उन पर पहले ही आर्थिक बोझ रहता है।

भाजपा सदस्य ने कहा कि देश भर में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम चलाया जा रहा है लेकिन इसके लिए डायलिसिस केंद्रों की संख्या बढ़ाना जरूरी है।

उन्होंने इन केंद्रों की संख्या बढ़ाने की मांग करते हुए सुझाव दिया कि स्वैच्छिक संस्थाओं, चैरिटेबल संस्थाओं और गैर सरकारी संगठनों की मदद से ग्रामीण इलाकों में डायलिसिस केंद्रों की स्थापना की जानी चाहिए ताकि गुर्दे की बीमारी से पीड़ित लोगों को राहत मिल सके।

भाजपा के ही डॉ विकास महात्मे ने घुमंतू जनजातियों का मुद्दा उठाया और कहा कि देश की आबादी में घुमंतू जनजातियों की संख्या करीब 10 प्रतिशत है लेकिन इनकी कोई पहचान नहीं है।

उन्होंने जनगणना में इन जनजातियों के लिए अलग श्रेणी बनाए जाने और इनके समुचित आंकड़े एकत्र करने की मांग की।

भाजपा के ही संजय सेठ ने शिक्षा से जुड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों में विद्यार्थियों से ऊंची फीस ली जाती है लेकिन उन्हें स्तरीय शिक्षा नहीं प्रदान की जाती।

कांग्रेस की रजनी अशोक पाटिल ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिभागियों को आयु सीमा में छूट दिए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी की वजह से पहले ही बहुत नुकसान हुआ है और युवा वर्ग भी इससे अछूता नहीं रहा है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, ओडिशा जैसे कुछ राज्यों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु सीमा में छूट दी है। उन्होंने मांग की कि ऐसी छूट और राज्यों में भी दी जानी चाहिए।

शून्यकाल में ही आईयूएमएल के अब्दुल वहाब ने लक्षद्वीप के लोगों को पोत के अभाव में आवागमन के लिए होने वाली समस्या का मुद्दा उठाया। वहीं तेलुगु देशम पार्टी के कनक मेदला रवींद्र कुमार ने देश भर में जहरीली शराब के सेवन से लोगों की मौत का मुद्दा उठाया और सरकार से इस बारे में एक ठोस नीति बनाए जाने की मांग की।

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