देश की खबरें | भाजपा नेता की मौत: न्यायालय में याचिका दायर करके बिहार में 13 जुलाई की घटना की जांच का अनुरोध
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर पटना में 13 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान हुई भाजपा के एक नेता की मौत के मामले की जांच के लिए शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन करने या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
नयी दिल्ली, 16 जुलाई उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर पटना में 13 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान हुई भाजपा के एक नेता की मौत के मामले की जांच के लिए शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन करने या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
नीतीश कुमार नीत सरकार के खिलाफ 13 जुलाई को ‘विधानसभा मार्च’ में हिस्सा लेने के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जहानाबाद जिले के नेता विजय सिंह की मृत्यु हो गई थी। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि पुलिस द्वारा लाठीचार्ज में उनकी मृत्यु हुई। वहीं, पटना में जिला प्रशासन ने एक संक्षिप्त बयान जारी कर कहा था कि सिंह के शव पर ‘‘चोट का कोई निशान नहीं’’ मिला।
राज्य सरकार की शिक्षक भर्ती नीति के खिलाफ आंदोलन के समर्थन में आयोजित ‘‘विधानसभा मार्च’’ पटना के गांधी मैदान से शुरू हुआ था और विधानसभा परिसर से कुछ किलोमीटर दूर रोक दिया गया था।
बिहार निवासी भूपेश नारायण द्वारा शीर्ष अदालत में दायर याचिका में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और बिहार के पुलिस महानिदेशक सहित अन्य अधिकारियों द्वारा 13 जुलाई को भाजपा द्वारा आयोजित शांतिपूर्ण मार्च के दौरान हुई घटना में कथित तौर पर ‘‘वास्तविक अपराधियों को बचाने’’ में निभाई गई भूमिका की जांच करने की भी मांग की गई है।
अधिवक्ता बरुण कुमार सिन्हा द्वारा दायर याचिका में कहा गया है, ‘‘कानून का राज और कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का संवैधानिक दायित्व है।’’ याचिका में कहा गया, ‘‘लोकतांत्रिक देश में सरकारी नीति के खिलाफ शांतिपूर्ण जुलूस या मार्च या प्रदर्शन विरोध का एक सर्वमान्य तरीका है।’’
याचिका में कहा गया है कि भारतीय नागरिकों के खिलाफ सत्ता का दुरुपयोग मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा है। याचिका में दावा किया गया कि पूर्व नियोजित तरीके से, मार्च में शामिल सदस्यों को अचानक पुलिस ने घेर लिया और लाठीचार्ज, पानी की बौछार और आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया गया, जिसके परिणामस्वरूप अराजक स्थिति पैदा हो गई।
याचिका में आरोप लगाया गया कि ‘‘पुलिस की बर्बरता और अत्याचार’’ के कारण सिंह की मौत हुई।
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