देश की खबरें | कर्नाटक के मुख्यमंत्री आवास के घेराव का प्रयास कर रहे भाजपा नेताओं को हिरासत में लिया गया

बेंगलुरु, तीन जुलाई कर्नाटक में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए बुधवार को यहां मुख्यमंत्री के कार्यालय एवं आवास का घेराव करने का प्रयास किया लेकिन उन्हें रोक दिया गया और एहतियातन हिरासत में ले लिया गया।

भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र, कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक, पूर्व मंत्री एस. सुनील कुमार, अरागा ज्ञानेंद्र, एस. सुरेश कुमार, सी एन अश्वथ नारायण तथा सी टी रवि समेत अन्य नेताओं के साथ कई विधायक तथा बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता थे।

भारी पुलिस बल तैनात होने के कारण भाजपा कार्यकर्ता अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाए और उन्हें एहतियातन हिरासत में ले लिया गया।

पार्टी का आरोप है कि मैसुरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) में करीब 4,000 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ जिनमें से एक लाभार्थी मुख्यमंत्री सिद्दरमैया की पत्नी पार्वती हैं।

भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि 180 करोड़ रुपये के महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाले को छिपाने की कोशिश की गई जिसके कारण एक लेखा अधीक्षक पी. चंद्रशेखरन ने आत्महत्या कर ली।

विजयेंद्र ने खुद को एहतियातन हिरासत में लिए जाने से पहले पत्रकारों से कहा, ‘‘कांग्रेस सरकार में भ्रष्टाचार जारी है। मुख्यमंत्री के गृह जिले मैसुरु का एमयूडीए घोटाला वाल्मीकि निगम में हुए घोटाले से कहीं बड़ा है।’’

अशोक ने मांग की कि सरकार को एमयूडीए घोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि मुख्यमंत्री को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने मामले की सीबीआई जांच की भाजपा की मांग को खारिज करते हुए कहा कि आरोप निराधार हैं।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "मैंने पहले ही जांच का आदेश दे दिया है। भाजपा को ऐसी मांग करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। वे हमसे यह मामला सीबीआई को सौंपने के लिए क्यों कह रहे हैं, जबकि उन्होंने राज्य में अपने कार्यकाल के दौरान एक भी मामला जांच एजेंसी को नहीं सौंपा था।"

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी पत्नी को राज्य में पिछली भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई एक योजना के तहत वैकल्पिक भूखंड मिले थे।

सिद्धरमैया ने कहा, "भाजपा नेता आरोप लगा रहे हैं कि भूमि खोने वालों को 50 प्रतिशत विकसित भूमि देने की नीति का दुरुपयोग किया गया है। यह देखने के लिए कि क्या कोई दुरुपयोग हुआ है या नहीं, हमने जांच के आदेश दिए हैं।"

उन्होंने संवाददाताओं से यह भी कहा कि एमयूडीए द्वारा (वैकल्पिक भूखंडों के रूप में) भूखंड आवंटन को निलंबित कर दिया गया है।

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