देश की खबरें | अशोक को चुनाव मैदान में उतार कर शिवकुमार की गढ़ में सेंध लगाने के प्रयास में है भाजपा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. चुनावी दंगल विपक्ष की जमीन पर लड़ने की रणनीति के तहत ‘बेहद मजबूत उम्मीदवार’ के साथ कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष डी. के. शिवकुमार को चुनौती दे रही भाजपा को कनकपुरा में सफलता मिलेगी या नहीं यह देखने वाली बात होगी।

कनकपुरा (कर्नाटक), छह मई चुनावी दंगल विपक्ष की जमीन पर लड़ने की रणनीति के तहत ‘बेहद मजबूत उम्मीदवार’ के साथ कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष डी. के. शिवकुमार को चुनौती दे रही भाजपा को कनकपुरा में सफलता मिलेगी या नहीं यह देखने वाली बात होगी।

बेंगलुरु के बाहरी हिस्से में स्थित रामनगर जिले की कनकपुरा सीट को शिवकुमार का गढ़ माना जाता है और 10 मई को होने वाले चुनाव में भाजपा की कामयाबी या हार पर सबकी प्रमुखता से नजर रहेगी।

आश्चर्यजनक कदम उठाते हुए भारतीय जनता पार्टी ने वोक्कालिगा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ नेता व मंत्री आर. अशोक को अपना उम्मीदवार बनाया है। वोक्कालिगा समुदाय और शिवकुमार के गढ़ में भाजपा कांग्रेस को चुनौती दे रही है।

मजेदार बात यह है कि जद(एस) ने भी वोक्कालिगा समुदाय के नेता बी. नागराजू को इस सीट से अपनी उम्मीदवार बनाया है।

कांग्रेस नेता शिवकुमार सात बार विधायक निर्वाचित हुए हैं, जिनमें से 2008 से अभी तक तीन बाद वह कनकपुरा से चुने गए हैं। वह चौथी पार इस सीट से निर्वाचन की इच्छा से चुनाव मैदान में हैं।

शिवकुमार इससे पहले 1989 से लगातार चार बार साठनुर से निर्वाचित हुए और परिसीमन के बाद विधानसभा सीट समाप्त होने के कारण वह 2008 से कनकपुरा से चुनाव लड़ रहे हैं।

शिवकुमार ने 2018 के चुनाव में 1,27,552 वोट प्राप्त किए और जनता दल (सेक्युलर) के उम्मीदवार नारायण गौड़ा (47,643) को 79,909 वोटों के अंतर से हराया।

शिवकुमार ने 2013 के चुनाव में जद(एस) के पीजीआर सिंधिया को 31,424 वोटों से और 2008 में भी जद(एस) के डी. एम. विश्वनाथ को 7,179 वोटों से हराया।

कहा जाता है कि कनकपुरा सीट से भाजपा का प्रदर्शन 2018 विधानसभा चुनाव में सबसे अच्छा रहा था और उसकी उम्मीदवार नंदीनी गौड़ा को 6,273 वोट मिले थे। उस दौरान पार्टी के हिस्से में करीब 3.37 प्रतिशत वोट पड़े थे। वहीं 2013 में पार्टी को महज 1,807 वोट मिले थे।

कनकपुरा के राजनीतिक परिदृष्य में शिवकुमार के प्रवेश से पहले यह सीट जनता पार्टी/जनता दल का गढ़ हुआ करता था और 1983 से 2004 तक सिंधिया लगातार छह बार चुनाव जीते थे।

जनता परिवार के वरिष्ठ नेता रामकृष्ण हेगड़े ने 1983 में मुख्यमंत्री बनने के बाद इस सीट से उपचुनाव लड़ा था।

राजनीतिक हलके में ‘डीके’ के नाम से लोकप्रिय शिवकुमार कर्नाटक में कांग्रेस के सत्ता में आने पर मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं।

शिवकुमार की चुनावी लोकप्रियता में स्थिर गति से हो रही वृद्धि के मद्देनजर उनके समर्थकों का मानना है और आशा है कि कांग्रेस नेता एक लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज करेंगे और इस बार मुख्यमंत्री बनेंगे।

लेकिन, भाजपा वर्तमान राजनीतिक परिदृष्य में बदलाव का प्रयास कर रही है और विधानसभा क्षेत्र से शिवकुमार की धाक खत्म करना चाहती है। आलोचक इस सीट को व्यंग्यात्मक रूप से ‘रिपब्लिक ऑफ कनकपुरा’ कहते हैं और कांग्रेस नेता पर आरोप लगता रहता है कि उन्होंने क्षेत्र में इस कदर पकड़ बना ली है कि विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं बची है।

शिवनहल्ली में चुनाव प्रचार के दौरान ‘पीटीआई/’ से बातचीत में भाजपा नेता अशोक ने कहा कि उनकी उम्मीदवारी के बाद क्षेत्र में दो दशक में पहली बार सही मायने में चुनाव हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शिवकुमार के खिलाफ और भाजपा के पक्ष में लहर है।

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