देश की खबरें | भाजपा तिरुप्परंकुन्ड्रम मुद्दे पर हिंसा भड़काने की कोशिश कर रही : द्रमुक मंत्री बाबू
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता और हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के मंत्री पी के शेखर बाबू ने बुधवार को आरोप लगाया कि भाजपा तिरुप्परंकुन्ड्रम मुद्दे पर सरकार के लिए खतरनाक स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रही है।
चेन्नई, पांच फरवरी तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता और हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के मंत्री पी के शेखर बाबू ने बुधवार को आरोप लगाया कि भाजपा तिरुप्परंकुन्ड्रम मुद्दे पर सरकार के लिए खतरनाक स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने भाजपा पर दंगे भड़काने का प्रयास करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि अगर हिंसा हुई तो मुख्यमंत्री एम के स्टालिन उस स्थिति से सख्ती से निपटेंगे।
बाबू ने दावा किया चार फरवरी को मदुरै के पलंगनाथम में तिरुप्परंकुन्ड्रम मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले स्पष्ट रूप से भाजपा के सदस्य थे, न कि हिंदू संगठनों के लोग।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा द्रमुक शासन के लिए ‘‘खतरा’’ पैदा करना चाहती है और भारी भीड़ जुटाकर उसने सांप्रदायिक दरार पैदा करने की कोशिश की । बाबू ने इस आंदोलन को अनुचित बताया।
मंत्री ने भाजपा पर एक ‘गैर-मुद्दे’ को उठाकर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें आश्चर्य नहीं होगा यदि अगले चुनाव में उसका वोट प्रतिशत शून्य हो जाए।
उन्होंने कहा, ‘‘हो सकता है कि उत्तरी राज्यों में ऐसा संभव हो। मैं एच राजा (वरिष्ठ भाजपा नेता) और के अन्नामलाई से कहना चाहूंगा कि हमारे मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने हमें इसे तूल नहीं देने को कहा है। आप यहां (तमिलनाडु) दंगे भड़काने की कोशिश कर रहे हैं, जैसा कि आप उत्तरी राज्यों में करते हैं। यहां के मुख्यमंत्री दृढ़ निश्चयी और सख्त हैं।’’
बाबू ने कहा कि मुख्यमंत्री तमिलनाडु में हिंसा नहीं होने देंगे और यदि हिंसा भड़काई गई तो स्टालिन उससे सख्ती से निपटेंगे। उन्होंने तमिलनाडु को द्रविड़वाद, पेरियार ई.वी. रामासामी की भूमि बताया और कहा कि यह द्रमुक के द्रविड़ मॉडल द्वारा शासित है।
इस मुद्दे से जुड़े लगभग एक सदी पुराने अदालती मामलों का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार ने अदालत के निर्देशों का पालन किया है। उन्होंने भाजपा को राजनीतिक लाभ लेने के खिलाफ चेतावनी दी है।
इससे जुड़े एक मुकदमे का फैसला ब्रिटिश राज के दौरान प्रिवी काउंसिल द्वारा तय किया गया था, और दो वर्तमान में दो याचिकाएं (वर्ष 2023 और 2025) लंबित हैं।
बाबू ने कहा, ‘‘सरकार अदालत के आदेश का पालन करेगी। सरकार सभी लोगों के लिए है।’’
उन्होंने कहा कि वह जल्द ही मदुरै में तिरुप्परंकुन्ड्रम पहाड़ी का निरीक्षण करेंगे।
भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने पलटवार करते हुए कहा कि यह भक्तों का शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन था। उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या कोई हिंसा हुई? क्या सार्वजनिक संपत्ति को कोई नुकसान पहुंचा? वहां भारी भीड़ थी, क्या किसी बस में आग लगाई गई? यह एक शांतिपूर्ण विरोध था। ’’
उन्होंने इस मुद्दे के लिए द्रमुक को दोषी ठहराया और पहाड़ी क्षेत्र में कथित मांसाहार के सेवन पर आपत्ति जताई तथा तुष्टिकरण की राजनीति के लिए सत्तारूढ़ पार्टी की आलोचना की।
अन्नामलाई ने कहा कि प्रिवी काउंसिल ने 1931 में मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया था, ऐसे में शेखर बाबू उस फैसले को पढ़ें।
उन्होंने दावा किया कि राज्य भर में करीब 350 जगहों पर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को मदुरै में विरोध स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए नजरबंद किया गया था।
कांग्रेस की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष के सेल्वापेरुन्थगई ने इस मुद्दे पर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह भाजपा ही थी जिसने अतीत में अयोध्या में दंगे कराए थे और वे अब इसे तिरुप्परंकुन्ड्रम में दोहराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सौहार्द्र कायम रखने के लिए छह फरवरी को दरगाह और भगवान मुरुगन मंदिर का दौरा करने की घोषणा की।
विवाद के मूल में कुछ मुसलमानों द्वारा तिरुप्परंकुन्ड्रम पहाड़ी पर स्थित दरगाह परिसर में कुर्बानी देने की अनुमति दिये जाने की मांग है। यह दरगाह उसी पहाड़ी पर काशी विश्वनाथ मंदिर के नजदीक है।
हिंदू संगठन वहां मांसाहार के सेवन के अलावा इस पर भी आपत्ति जता रहे हैं कि कुछ लोग कथित तौर पर इसका नाम ‘सिकंदर’ पहाड़ी रख रहे हैं, जबकि पारंपरिक रूप से इसे तिरुप्परंकुन्ड्रम पहाड़ी के नाम से जाना जाता है।
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