ताजा खबरें | बिरला ने नारे लिखी टी-शर्ट पहने द्रमुक सदस्यों को दिलाई नियम 349 की याद

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के सदस्य बृहस्पतिवार को नारे लिखी टी-शर्ट पहनकर लोकसभा में पहुंचे तो अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें नियम 349 की याद दिलाई और कहा कि उनका यह आचरण इस नियम के साथ ही सदन की मर्यादा के प्रतिकूल है।

नयी दिल्ली, 20 मार्च द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के सदस्य बृहस्पतिवार को नारे लिखी टी-शर्ट पहनकर लोकसभा में पहुंचे तो अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें नियम 349 की याद दिलाई और कहा कि उनका यह आचरण इस नियम के साथ ही सदन की मर्यादा के प्रतिकूल है।

पूर्वाह्न 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर बिरला ने द्रमुक सदस्यों को लोकसभा की मर्यादा की याद दिलाई। साथ ही, सत्ता पक्ष के कुछ सदस्यों ने भी आपत्ति जताई।

बिरला ने द्रमुक सदस्यों से कहा, ‘‘सदन मर्यादा और गरिमा से चलता है। मैं कुछ दिनों से देख रहा हूं कि सदस्य गण सदन की गरिमा को भंग कर रहे हैं और सदन के नियम- प्रक्रियाओं का पालन नहीं कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘नियम संख्या 349 आपको पढ़ना चाहिए। इसमें सदन की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए कैसा व्यवहार किया जाना चाहिए और कैसा आचरण होना चाहिए, उस बारे में लिखा हुआ है।’’

लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों को आगाह करते हुए कहा, ‘‘अगर आप टी-शर्ट पहनकर यहां (सदन में) आएंगे, नारे लगाते आएंगे, नारे लिखकर आएंगे तो सदन की कार्यवाही नहीं चलेगी। अगर आप टी-शर्ट नहीं पहनकर आएंगे, तभी सदन की कार्यवाही चलेगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘चाहे कोई भी बड़ा नेता हो, सदन की मर्यादा और परंपराओं का उल्लंघन करेगा तो लोकसभा अध्यक्ष होने के नाते उसे (सदन की गरिमा को) बनाए रखना मेरी जिम्मेदारी है।’’

बिरला ने जिस नियम 349 का हवाला दिया वह ‘‘सदन में सदस्यों द्वारा अनुपालन किए जाने वाले नियमों’’ से संबंधित है।

नियम 349(16) में कहा गया है, ‘‘जब सदन की कार्यवाही जारी हो, कोई सदस्य सदन में झंडे, प्रतीक या कोई प्रदर्शनी प्रदर्शित नहीं करेगा।’’

इसकी एक अन्य उपधारा सदस्यों को लैपेल पिन या बैज के रूप में राष्ट्रीय ध्वज को छोड़कर, सदन में किसी भी प्रकार का बैज पहनने या प्रदर्शित करने से रोकती है।

द्रमुक के सदस्य परिसीमन के विषय पर नारे लिखी हुई टी-शर्ट पहनकर सदन में पहुंचे थे। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी की मांग है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे उन प्रदेशों को लोकसभा सीटों के संदर्भ में नुकसान होगा जिन्होंने प्रभावी ढंग से जनसंख्या नियंत्रण किया है।

हक

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