देश की खबरें | बिरला ने मणिपुर में शांति का आह्वान किया, कहा-हिंसा की घटनाएं 'पीड़ादायक'
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को मणिपुर में शांति का आह्वान करते हुए कहा कि तीन मई को हिंसा भड़कने के बाद से राज्य में जो घटनाएं हुई हैं, वे ‘‘पीड़ादायक’’ हैं।
शिलांग, 29 जुलाई लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को मणिपुर में शांति का आह्वान करते हुए कहा कि तीन मई को हिंसा भड़कने के बाद से राज्य में जो घटनाएं हुई हैं, वे ‘‘पीड़ादायक’’ हैं।
बिरला ने यहां राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए), भारत क्षेत्र के 20वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि केवल शांति ही राज्य और क्षेत्र में समृद्धि ला सकती है। इस सम्मेलन का आयोजन मेघालय विधानसभा परिसर में किया गया।
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, मेघालय विधानसभा अध्यक्ष थॉमस ए संगमा और अरुणाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष पी डी सोना चार दिवसीय सम्मेलन में भाग लेने वाले गणमान्य व्यक्तियों में शामिल हैं। सम्मेलन में पूर्वोत्तर राज्यों के सांसद और मेघालय के विधायक भी भाग ले रहे हैं।
बिरला ने कहा, ‘‘हाल के दिनों में जो भी अमानवीय घटनाएं घटी हैं, उससे मुझे दुख हुआ है। हम सभी उससे आहत हैं। पूरे समाज, राज्यों और पूरे देश को शांति के रास्ते पर चलना चाहिए। हम सभी को शांति की बहाली के लिए प्रयास करने चाहिए।’’
मणिपुर की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ''ये घटनाएं बहुत दुखद हैं और हम सभी को पीड़ा पहुंचाती हैं।''
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे व्यवहार से किसी को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए। यही हमारा प्रयास होना चाहिए। एक समाज के तौर पर यह हमारा नैतिक कर्तव्य है।’’
बिरला ने कहा कि देश और सभी राज्यों के साथ-साथ सभी सामाजिक समूहों को शांति के रास्ते पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी को शांति बहाली के लिए प्रयास करना चाहिए। इसलिए, हम मानवता के दृष्टिकोण से शांति का आह्वान करते हैं।’’
पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर तीन मई से जातीय हिंसा की चपेट में है, जिसमें अब तक 160 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।
बाद में मेघालय विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए, लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा कि प्रतिनिधियों ने मणिपुर की स्थिति पर चिंता व्यक्त की और शांति बहाल करने के लिए संयुक्त प्रयास करने का आह्वान किया।
बिरला ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम सभी मानवता, शांति का आह्वान करते हैं। शांति खुशी और समृद्धि लाती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सभी विधानसभा अध्यक्षों ने शांति की अपील की।’’
चार दिवसीय सम्मेलन में पूर्वोत्तर क्षेत्र के विशेष संदर्भ में प्राकृतिक आपदाओं के मुद्दों और प्रबंधन की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। प्रतिनिधि देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र को क्षेत्रीय सम्पर्क के मामले में शेष भारत के बराबर लाने पर भी चर्चा करेंगे।
सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान असम विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी भी उपस्थित थे।
बिरला ने सम्मेलन के एजेंडे को प्रासंगिक और समसामयिक बताया और कहा कि पूर्वोत्तर राज्य जैव विविधता से समृद्ध हैं और यहां होने वाला कोई भी पारिस्थितिक असंतुलन पूरे भारत की पर्यावरणीय स्थिति पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए ऐसे संवेदनशील इलाकों में आपदा प्रबंधन के लिए बेहतर तैयारी करने की जरूरत है।’’
लोकसभा अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि आपदा प्रबंधन के लिए ऐसी नीतियां बनाते समय, प्रधानमंत्री के 10-सूत्री एजेंडे को ध्यान में रखा जाना चाहिए, जो स्थानीय क्षमताओं के निर्माण की आवश्यकता पर जोर देता है।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने क्षेत्रीय महत्व के विभिन्न मुद्दों पर बातचीत जारी रखने की पहल करने के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र के पीठासीन अधिकारियों की सराहना की।
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