देश की खबरें | नाबालिग लड़की की मौत के बाद मुआवजे को लेकर जैविक, गोद लेने वाले माता-पिता भिड़े

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. तीन महीने पहले डूबने से 16 वर्षीय एक लड़की की मौत के बाद ओडिशा सरकार द्वारा मुआवजे के तौर पर घोषित चार लाख रुपये की रकम पर उसके जैविक माता-पिता व उसे गोद लेने वाले माता-पिता दोनों दावा कर रहे हैं।

केंद्रपाड़ा (ओडिशा), 10 फरवरी तीन महीने पहले डूबने से 16 वर्षीय एक लड़की की मौत के बाद ओडिशा सरकार द्वारा मुआवजे के तौर पर घोषित चार लाख रुपये की रकम पर उसके जैविक माता-पिता व उसे गोद लेने वाले माता-पिता दोनों दावा कर रहे हैं।

नमिता, ओस्टिया गांव के रहने वाले रंजन माई और रुपाली माई की जैविक पुत्री थी। बाद में उसे गोपालजेवपातना गांव के रत्नाकर दास और ममता दास ने कानूनी रूप से गोद ले लिया था।

चूंकि दोनों पक्ष मुआवजा राशि उन्हें दिए जाने की मांग कर रहे हैं, इसलिए वह किसी को नहीं दी गई। यहां तक कि मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी नहीं किया जा सका।

राजनगर के तहसीलदार अश्विनी कुमार भूयन ने कहा, “हम कानूनी रूप से पात्र माता-पिता को रकम देंगे।”

आधार कार्ड और विद्यालय दाखिला पंजी में नमिता के माता-पिता के तौर पर रत्नाकर व ममता के नाम का उल्लेख है।

उसके जैविक माता-पिता रंजन और रूपाली बृहस्पतिवार को राजनगर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के सामने अपनी बेटी के मृत्यु प्रमाण पत्र की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गए।

अधिकारियों के मुताबिक, उस सीएचसी का चिकित्सा अधिकारी नमिता का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करेगा जिसमें उसके माता-पिता का नाम होगा। अधिकारियों के अनुसार मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर अनुग्रह राशि दी जाएगी।

सीएचसी की चिकित्सा अधिकारी रश्मि रंजन मोहंती ने कहा, “प्रासंगिक दस्तावेजों की जांच करने और सरकारी अधिकारियों और याचिकाकर्ताओं से परामर्श करने के बाद, हम नमिता का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करेंगे।”

रंजन माई ने दावा किया, “मेरी बेटी के जन्म प्रमाण पत्र पर पिता के रूप में मेरा नाम अंकित है। इसलिए मैं प्रतिपूरक भत्ता पाने का हकदार हूं।”

नमिता को गोद लेने वाले रत्नाकर दास ने दलील दी, “आधार कार्ड और स्कूल दाखिला पंजी के अनुसार, मैं उसका पिता हूं। इस तरह दावे पर मेरा कानूनी अधिकार हैं।”

केंद्रपाड़ा के एक वकील सुभाष दास ने कहा, “अगर गोद लेने की प्रक्रिया कानूनी तौर पर हुई है तो जैविक माता-पिता का बच्चे के साथ कोई कानूनी संबंध नहीं है। इस प्रकार, वे मुआवजा राशि पाने के हकदार नहीं हैं।”

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